
वाराणसी। शुक्रवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “रीइमैजिनिंग टीचर एजुकेशन फॉर विकसित भारत @2047” विषय पर दो दिवसीय नेशनल कंसल्टेटिव मीट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन का शुभारंभ डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके उपरांत अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती तथा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने की। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान),आईयूसीटीई ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर उन्होंने राधाकृष्णन आयोग के विचारों को दोहराते हुए कहा कि शिक्षक-तैयारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का मूल आधार है और इस दिशा में हमें व्यापक एवं गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने सभी विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि इस राष्ट्रीय परामर्श बैठक का आयोजन शिक्षक शिक्षा की पुनर्कल्पना की आवश्यकता को समझने तथा उसकी भावी दिशा निर्धारित करने के उद्देश्य से किया गया है, ताकि शिक्षक शिक्षा भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में प्रभावी योगदान दे सके, जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा।
अन्य सत्रों में, मुख्य वक्ता प्रो. ए. सी. पांडे, निदेशक, आईयूएसी, नई दिल्ली ने कहा कि एक सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए हमें स्टीम (STEAM) विषयों में शिक्षा, शोध और नवाचार को और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में कौशल विकास, समानता, और समावेशन प्राथमिकता देते हुए हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर सके। उन्होंने बल दिया कि इन सभी आयामों पर समन्वित प्रयासों के माध्यम से ही हम विकसित भारत @2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में प्रभावी रूप से आगे बढ़ सकते हैं। आज आयोजित चार विभिन्न सत्रों में देश के 20 से अधिक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षक शिक्षा की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने शिक्षक शिक्षा की पुनर्कल्पना, उच्च शिक्षा में उभरते परिवर्तन, संकाय विकास, शोध एवं नवाचार तथा आईयूसीटीई की भावी भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया। इस व्यापक परिचर्चा का उद्देश्य विकसित भारत @2047 के अनुरूप शिक्षक शिक्षा को अधिक सशक्त, नवाचारी एवं भविष्य उन्मुख बनाने के लिए ठोस सुझाव और भावी दिशा विकसित करना रहा।
इस कार्यक्रम में प्रो. ए. सी. पांडे, प्रो. पी. नाग, प्रो. सी. बी. शर्मा, प्रो. अमित कौट्स, प्रो. के. पुष्पनाधम, प्रो. रजनीश जैन, प्रो. मधुलिका अग्रवाल, प्रो. आशीष श्रीवास्तव, प्रो. बिमल किशोर, प्रो. सुरेंद्र कुमार शर्मा, प्रो. पी. के. मिश्रा तथा प्रो. जे. एन. बलिया सहित अन्य विद्वानों ने अपने विचार एवं सुझाव साझा किए।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन तथा संचालन डॉ. राजा पाठक, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने किया।







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