गृहस्थ जीवन सबसे बड़ा धर्म है, गृहस्थ जीवन में एक दूसरे का साथ इस भावना के साथ पूरा करना चाहिए:-अभिराम दास जी महाराज 

 

श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा तीसरा 

 

 

वाराणसी। राजघाट ,भदऊ चुंगी स्थित श्री साईं धाम अपार्टमेंट वेंसमेंट में श्री काशी विश्वनाथ भगवान के तत्वावधान में आयोजित 6 अगस्त से 12 अगस्त 2026 तक श्रीमद्भागवत कथा रस महोत्सव का शनिवार को तीसरा दिन रहा।

 

श्रीमद्भागवत कथा शुरु होने से पहले मुख्य यजमान प्रदीप मिश्रा ने पोथी की विधिवत पूजा अर्चना एवं कथावाचक की माल्यार्पण कर स्वागत किया।

 

उपस्थित भक्तों को वृंदावन धाम से पधारे श्री अभिराम दास जी महाराज ने शिवसती चरित्र, शिव विवाह पर प्रकाश डालते हुए कहा जिस तरह ध्रुव जी महाराज 5 वर्ष की अवस्था में भगवान की प्राप्ति की। अतः भगवान को प्राप्त करने करने लिए समय व उम्र की आवश्यकता नहीं होती।भगवान को प्राप्त करने हेतु प्रारभ्य से भक्ति से जुड़ना होगा।

 

प्रमुख कथावाचक श्रद्धेय अभिराम दास जी महाराज ने भक्तगण को बताया गृहस्थ जीवन सबसे बड़ा धर्म है क्योंकि गृहस्थ से ही बालप्रस्थ, ब्रह्मचारी तपस्वी प्रकट होते हैं।

 

उन्होंने कहा कि हम सभी को गृहस्थ जीवन में एक दूसरे का साथ देकर इस भावना को पूरा करना चाहिए।

 

महराज जी ने कहा सुखदेव जी व्दारा राजा परीक्षित को उपदेश दिया, ज्ञान विधि,विराट रुप का वर्णन ज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य के हृदय को शांति प्राप्त हो सकती है।

 

उन्होंने कहा कि भगवान श्री की उपासना में किसी भी तरह की कामना नहीं होनी चाहिए।

 

ज्ञातव्य हो कि श्रीमद्भागवत 12 अगस्त तक सांय काल 3 बजे से उपस्थित भक्तगण को महराज जी कथा श्रवण करायेंगे।

कथा के उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया।

श्रीमद्भागवत कथा श्रवण में सर्वश्री मुकुंद लाल शर्मा, मयंक शर्मा, शुचि शर्मा, रीता मिश्रा,रुद्र शर्मा, विक्रांत मिश्रा, सचिन मिश्रा, पूजा मिश्रा, डाली मिश्रा, रिया मिश्रा, आशीष मिश्रा, सिध्दांत मिश्रा,सहित सैकड़ों भक्त गण शामिल रहे।

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