हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत सर्किट हाउस में लगी ऐतिहासिक प्रदर्शनी, शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि

 

लोकगीत के स्वरों में गूंजी क्रांति की गाथा, स्कूली बच्चों ने जाना स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास

 

वाराणसी। 9 अगस्त 1925 के ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर शनिवार को सर्किट हाउस परिसर में राष्ट्रभक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां भाव एवं दिव्य प्रदर्शनी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरा परिसर भारत माता के वीर सपूतों की स्मृतियों से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने शहीद राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, शहीद अशफ़ाकउल्लाह ख़ाँ, शहीद रामप्रसाद बिस्मिल और शहीद ठाकुर रोशन सिंह सहित अन्य क्रांतिकारियों के चित्रों के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।

 

*प्रदर्शनी में जीवंत हुई काकोरी क्रांति की गाथा*

 

सर्किट हाउस में लगाई गई हर घर तिरंगा एवं काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित प्रदर्शनी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। प्रदर्शनी में काकोरी कांड से जुड़े क्रांतिकारियों के जीवन से संबंधित दुर्लभ और शोधपरक जानकारियां प्रदर्शित की गईं। प्रत्येक क्रांतिकारी के बारे में उनकी जन्म तिथि, जन्म स्थान, शिक्षा-दीक्षा, वैचारिक पृष्ठभूमि, संगठनात्मक भूमिका, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, गिरफ्तारी, मुकदमे की प्रक्रिया और दी गई सजाओं का विस्तृत विवरण आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

 

प्रदर्शनी में विशेष रूप से बताया गया कि ब्रिटिश सरकार ने काकोरी षड्यंत्र मामले में किस प्रकार कठोर दमनात्मक कार्रवाई की थी। इसमें रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्लाह ख़ाँ, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा दिए जाने का उल्लेख प्रमुखता से किया गया। इसके अतिरिक्त सचिंद्रनाथ सान्याल, गोविंद चरण कर, मुकुंद लाल, सचिंद्रनाथ बक्शी, जोगेश चंद्र चटर्जी, रामकृष्ण खत्री सहित अनेक क्रांतिकारियों को दी गई सजाओं और उनके संघर्षों का भी विस्तार से उल्लेख किया गया।

 

*दुर्लभ हस्ताक्षर और ऐतिहासिक दस्तावेज बने आकर्षण*

 

प्रदर्शनी में कुछ क्रांतिकारियों के मूल हस्ताक्षरों की प्रतिकृतियां, ऐतिहासिक पत्र, मुकदमे से संबंधित दस्तावेज और दुर्लभ चित्र भी प्रदर्शित किए गए। इन दस्तावेजों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग रुके और उनके बारे में जानकारी प्राप्त की। युवा पीढ़ी के लिए यह प्रदर्शनी स्वतंत्रता आंदोलन के वास्तविक इतिहास से परिचित होने का एक महत्वपूर्ण अवसर बनी।

 

*शिक्षा-दीक्षा और व्यक्तित्व पर विशेष फोकस*

 

प्रदर्शनी के एक विशेष खंड में क्रांतिकारियों की शिक्षा-दीक्षा, साहित्यिक अभिरुचि, वैचारिक प्रतिबद्धता और व्यक्तित्व विकास पर प्रकाश डाला गया। इसमें बताया गया कि अनेक क्रांतिकारी उच्च शिक्षित, साहित्य प्रेमी और राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित युवा थे, जिन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग कर मातृभूमि की स्वतंत्रता को सर्वोच्च स्थान दिया।

 

*सभागार में गूंजे देशभक्ति के स्वर*

 

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। लोकगीत गायकों ने शहीदों की वीरता, त्याग और बलिदान पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। उनके स्वरों में काकोरी के वीरों की क्रांति की पुकार जीवंत हो उठी। दर्शकों ने तालियों और भावुक अभिव्यक्तियों के साथ इन प्रस्तुतियों का स्वागत किया।

 

*बच्चों ने जाना स्वतंत्रता संग्राम का वास्तविक इतिहास*

 

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए। बच्चों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर शहीदों के जीवन, संघर्ष और बलिदान के बारे में जानकारी प्राप्त की। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी में देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना के संस्कार विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

*जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि*

 

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्य,विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) धर्मेंद्र सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष राम सकल पटेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरी, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि काकोरी के वीरों का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर है।

 

*काकोरी कांड: स्वतंत्रता आंदोलन का निर्णायक अध्याय*

 

वक्ताओं ने कहा कि 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने को ले जा रही ट्रेन को काकोरी स्टेशन के निकट रोककर अंग्रेजी शासन को सीधी चुनौती दी थी। यह घटना औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध संगठित क्रांतिकारी चेतना का प्रतीक थी।

 

*शहीदों की प्रेरणा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प*

 

समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और संकल्प लिया कि उनके आदर्शों और राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *