
रिपोर्ट:- उपेन्द्र कुमार पांडेय
आजमगढ़। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आयुष चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। चिकित्सक अभ्यर्थियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी की गई चयन सूची में भारी अनियमितता और धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी से मुलाकात कर भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने या इसे पूरी तरह रद्द करने की मांग की है।
डॉ. दुर्गेश सिंह के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को लेकर आरोप लगाया कि विज्ञप्ति में अनारक्षित वर्ग की 23 सीटों में से केवल 14 सामान्य अभ्यर्थियों को चयनित किया गया, जबकि शेष 9 सीटों पर ओबीसी अभ्यर्थियों का चयन दिखाया गया। अन्य वर्गों की सूची अलग बनाए जाने के बावजूद केवल ओबीसी अभ्यर्थियों को मेरिट का हवाला देकर अनारक्षित सूची में डाला गया। अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि 60 से 65.5 मेरिट वाले अन्य वर्ग के उम्मीदवार अनारक्षित में रखे गए, तो इसी मेरिट वाले एससी एसटी अभ्यर्थियों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया। 958 अर्ह अभ्यर्थियों की पहली सूची में जो उम्मीदवार शामिल नहीं थे, उन्हें 6 अगस्त को अचानक साक्षात्कार सूची में जोड़ा गया और 7 अगस्त को हड़बड़ी में अंतिम रूप से चयनित कर लिया गया। साक्षात्कार समाप्त होने के अगले ही दिन 7 अगस्त चयन सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जबकि आजमगढ़ की आधिकारिक एनआईसी वेबसाइट Azamgarh.nic.in पर इसे 15 से 20 घंटे बाद अपलोड किया गया। राजनीतिक दबाव और विभागीय संलिप्तता के चलते विभाग में कार्यरत चिकित्सकों व भाजपा व सपा नेताओं के रिश्तेदारों को प्राथमिकता दी गई। अनारक्षित सीटों पर सैकड़ों पात्र सामान्य अभ्यर्थियों के मौजूद होने के बावजूद नियमों की अनदेखी कर भर्ती की गई। साक्षात्कार में शामिल सभी अभ्यर्थियों की अंतिम कट-ऑफ या संपूर्ण मेरिट लिस्ट सार्वजनिक नहीं की गई। पीड़ित अभ्यर्थियों ने मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से मांग की है कि इस भर्ती को तत्काल रोककर किसी निष्पक्ष एजेंसी से इसकी जांच कराई जाए। साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पुनः लिखित परीक्षा के माध्यम से रिक्त पदों को भरा जाए। इस दौरान डॉ प्रियंका यादव, डॉ अनमोल सिंह, रामनारायण, अश्विनी आदि मौजूद रहे।




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