
श्रीमद्भागवत कथा का छठवां दिन, पूर्व मंत्री, शहर दक्षिणी विधायक डा नीलकंठ तिवारी हुए शामिल।
बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा को पूर्णाहुति व भण्डारा आयोजित है ।
वाराणसी। राजघाट ,भदऊ चुंगी स्थित श्री साईं धाम अपार्टमेंट वेंसमेंट में श्री काशी विश्वनाथ भगवान के तत्वावधान में आयोजित 6 अगस्त से 12 अगस्त 2026 तक श्रीमद्भागवत कथा रस महोत्सव का मंगलवार को छठवां दिन रहा।
पूर्व मंत्री, शहर दक्षिणी विधायक डा नीलकंठ तिवारी श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए।
श्रीमद्भागवत कथा शुरु होने से पहले मुख्य यजमान प्रदीप मिश्रा ने पोथी की विधिवत पूजा अर्चना एवं कथावाचक अभिराम दास जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
उपस्थित भक्तों को वृंदावन धाम से पधारे प्रमुख श्रीमद्भागवत कथावाचक श्री अभिराम दास जी महाराज ने बताया भगवान ने 7 वर्ष की अवस्था में 7 दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर धारण किया, भगवान ने इंद्र का मान मर्दन किया।
श्रीमद्भागवत कथावाचक ने सुखदेव जी द्वारा दिव्य रासलीला का वर्णन किया गया। श्री कृष्ण के लिए गोपियों ने अपना सर्वस्व निवेदित कर दिया। अतः यह महारास का प्रसंग जीवन में हमें यह सिखाता है जीव और परमात्मा का मिलन ही महारास है जिस प्रकार भगवान ने गोपियों का चीर हरण करके महारास का अधिकारी बनाया चीर हरण माने माया का पर्दा किसी सद्गुरु के द्वारा ही भगवान इस माया के पर्दे को हटवाते हैं और जीव का परमात्मा से मिलन हो जाता है।
भागवत में भगवान का एक नाम रस रूप ही है अतः प्रेम भक्ति में परमात्मा रस रूप से प्रकट हो जाता है और सुगमता से भक्ति पथ पर आरुण हुए भक्त पर ईश्वर अनुग्रह करते हैं और उसे अपना तत्व ज्ञान प्रदान कर देते हैं।
कथा में धूमधाम से मोर नृत्य के साथ महारास उत्सव मनाया गया। आगे युगल गीत ,अक्रूर जी की ब्रज यात्रा,कृष्ण बलराम का मथुरा आगमन, कुब्जा पर कृपा धनुष भंग ,करके कंस का वध करना एवं समस्त मथुरा वासियों को चिंता मुक्त करना आगे के पावन प्रसंग में गोपी उद्धव संवाद, के माध्यम से बताया भक्ति मार्ग में ज्ञान को ही मनुष्य अपना सर्वस्व मान लेता है लेकिन जब तक इस देह में प्रेम नहीं होगा वह ज्ञान किसी काम का नहीं रहेगा ।अतः गोपी उद्धव प्रसंग हमें यह बताता है ज्ञान के साथ प्रेम भी आवश्यक है ,आगे श्री राधा जी एवं गोपियों के माध्यम से भ्रमर गीत द्वारा उद्धव जी को तत्वज्ञान की प्राप्ति हुई और उद्धव जी की 6 महीने तक गोपियों के प्रेम में वृंदावन में समाधि लग गई यही प्रेम की स्थिति है।
आगे अन्य कथाओं का प्रसंग श्रवण करते हुए दिव्य द्वारकाधीश एवं रुक्मणी महारानी का मंगल विवाह महामहोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।
ज्ञातव्य हो कि श्रीमद्भागवत कथा 12 अगस्त 2026,दिन बुधवार, सुबह 11 बजे कथा का पूर्णाहुति व भण्डारा आयोजित है।
कथा के उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया।
श्रीमद्भागवत कथा श्रवण में सर्वश्री
डॉली मिश्रा,प्रदीप कुमार मिश्र, पूजा मिश्रा,रीता मिश्रा, रुद्र मिश्र,
सिद्धान्त मिश्र,सचिन मिश्र, मुकुन्द लाल शर्मा,मयंक शर्मा, शुचि शर्मा,
आशीष मिश्रा,रिया मिश्रा सहित अनेक श्रोता गण शामिल रहे।

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