
अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र
वाराणसी । मंगलवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा “भारतीय ज्ञान परम्परा”* विषय पर छः दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी तथा प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, वाराणसी के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र के वक्ता डॉ. अनुराग पाण्डेय, सहायक प्राध्यापक, आयुर्वेद संकाय, बीएचयू, ने “आयुर्वेद एंड वेलनेस” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है। आज की जीवनशैली में वेलनेस केवल रोगमुक्त रहने तक सीमित नहीं, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य का प्रतीक बन गया है। योग, ध्यान और प्राकृतिक आहार के साथ आयुर्वेदिक उपचार जीवन को संतुलित और ऊर्जावान बनाते हैं। वेलनेस का उद्देश्य है, रोगों की रोकथाम, मानसिक शांति और दीर्घायु। आयुर्वेद और वेलनेस मिलकर आधुनिक समाज को स्वस्थ जीवन की दिशा दिखा रहे हैं।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रो. के. के. द्विवेदी, मेंबर, एनसीआईएसएम, न्यू दिल्ली ने “इंटीग्रेटिंग हेल्थ, वेल-बीइंग एंड वैल्यू एजुकेशन इंटू हायर एजुकेशन’’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि आज की शिक्षा केवल ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जीवन मूल्यों और स्वास्थ्य को भी साथ लेकर चलनी चाहिए। उच्च शिक्षा में हेल्थ और वेल-बीइंग को जोड़ने से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है। मूल्य शिक्षा के साथ मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य, समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे। यह पहल शिक्षा को अधिक मानवीय और जीवनोपयोगी बनाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के तृतीय सत्र में डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी, ने “इंडियन फिलॉसफी: एपिस्टेमोलॉजी एंड ऑण्टोलॉजी (प्रमाण एंड पदार्थ) विथ एसेंशियल कॉन्सेप्ट्स ऑफ़ षड्दर्शन” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि भारतीय दर्शन में प्रमाण और पदार्थ की गहरी परंपरा रही है। प्रमाण और पदार्थ की अवधारणाएँ सत्य और अस्तित्व को समझने का आधार प्रदान करती हैं। षड्दर्शन के मूल सिद्धांत जीवन, ब्रह्मांड और आत्मा के रहस्यों को उजागर करते हैं। आज उच्च शिक्षा में इन अवधारणाओं का समावेश विद्यार्थियों को गहन चिंतन और मूल्य आधारित दृष्टि देता है। कार्यक्रम के चतुर्थ सत्र में प्रतिभागियों ने व्यक्तिगत पी.पी.टी. प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया।
इस छः दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी तथा डॉ. राजा पाठक, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है।

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