इण्डियन मैथमेटिक्स एण्ड एस्टोनामी पर कार्यशाला में मंथन

भारतीय ज्ञान परम्परा आनलाइन कार्यशाला का तीसरा दिन

 

वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा *“भारतीय ज्ञान परम्परा”* विषय पर छः दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी तथा प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, वाराणसी के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।

 

तीसरे दिन के प्रथम सत्र के वक्ता डॉ. आयुष गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, ने “एंशिएंट इंडियन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने बताया कि भारत की प्राचीन परंपराओं में विज्ञान और तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। वेदों और शास्त्रों में वर्णित ज्ञान आज भी आधुनिक अनुसंधान को दिशा देता है। अभियांत्रिकी की प्राचीन विधियाँ स्थापत्य कला और धातु विज्ञान में झलकती हैं। इन खोजों ने न केवल भारतीय सभ्यता को समृद्ध किया, बल्कि विश्व को भी नई दृष्टि दी। आज उच्च शिक्षा में इन विषयों का समावेश युवाओं को नवाचार और मूल्य आधारित सोच की ओर प्रेरित करता है।

 

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रो. विनय कुमार पाण्डेय, समन्वयक, वैदिक विज्ञान केन्द्र, बी.एच.यू., वाराणसी ने “इंडियन मैथमेटिक्स एंड एस्ट्रोनॉमी” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में गणित और खगोल विज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिलता है । शून्य और दशमलव प्रणाली का आविष्कार भारत की देन है। आर्यभट और वराहमिहिर जैसे विद्वानों ने खगोल विज्ञान को नई ऊँचाइयाँ दीं। ग्रहों की गति और समय गणना की विधियाँ आज भी वैज्ञानिकों को प्रेरित करती हैं। यह धरोहर आधुनिक विज्ञान और तकनीक के लिए आधारशिला साबित हुई है। साथ ही, तृतीय सत्र में समूह प्रस्तुतीकरण हुआ।

 

कार्यक्रम के चतुर्थ सत्र में प्रो. संजय कुमार शर्मा, आई.आई.टी (बी.एच.यू.), वाराणसी ने “एसटीईएम एजुकेशन थ्रू इंडियन नॉलेज सिस्टम्स” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान, गणित और तकनीक का गहरा आधार रहा है। आज एसटीईएम शिक्षा को इन परंपराओं से जोड़कर विद्यार्थियों को नई दृष्टि दी जा रही है। वैदिक गणित, आयुर्वेद और खगोल विज्ञान जैसे विषय आधुनिक शिक्षा में नवाचार को प्रेरित करते हैं। यह पहल युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ती है। भारतीय ज्ञान प्रणाली के माध्यम से एसटीईएम शिक्षा मूल्य आधारित और समग्र विकास की ओर अग्रसर है।

 

इस छः दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी तथा डॉ. राजा पाठक, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है।

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