
वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा “एआई-इन्फ्यूज़्ड इमर्सिव इन्क्वायरी पेडागॉजी वर्कशॉप फॉर फिजिकल साइंस एजुकेटर्स” विषय पर पाँच दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र का प्रारंभ डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा अतिथि परिचय एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ हुआ। इसके पश्चात आईयूसीटीई का परिचयात्मक वीडियो प्रस्तुत किया गया।
सत्र की अध्यक्षता आईयूसीटीई के प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई ने की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि आगामी पाँच दिनों में कार्यशाला के दौरान प्राप्त ज्ञान, कौशल एवं अनुभवों को प्रतिभागी अपने-अपने शिक्षण कार्य में प्रभावी रूप से लागू करें। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि कार्यशाला की सार्थकता केवल नए ज्ञान के अर्जन में नहीं, बल्कि उसे कक्षा-कक्ष में व्यवहारिक रूप से अपनाने और विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी एवं समृद्ध बनाने में निहित है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुशाग्री सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा प्रस्तुत किया गया।
प्रथम सत्र में प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, बीएचयू ने “फाउंडेशन्स ऑफ एनईपी 2020 एंड एजुकेशन 5.0: रीइमैजिनिंग फिजिकल साइंसेज़ पेडागॉजी” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं एजुकेशन 5.0 की मूल अवधारणाओं को रेखांकित करते हुए भौतिक विज्ञान के शिक्षण में नवाचार, तकनीकी एकीकरण तथा विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समकालीन शिक्षा व्यवस्था में भौतिक विज्ञान के शिक्षण को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन एवं समस्या-समाधान जैसी क्षमताओं का विकास करना आवश्यक है। द्वितीय सत्र में डॉ. वी. वी. सत्यनारायण, इंजीनियर–डी, आईयूएसी, नई दिल्ली ने “एक्सपीरिएन्शियल लर्निंग: फ्रॉम कॉन्सेप्ट टू कॉन्क्रीट एप्लीकेशन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अनुभवात्मक अधिगम की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि किस प्रकार विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष प्रयोग, अवलोकन, अन्वेषण एवं व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से अमूर्त वैज्ञानिक अवधारणाओं को ठोस एवं जीवनोपयोगी अनुभवों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने ओपन-सोर्स लैब टूल्स, विशेष रूप से एक्सपीईईज़ के माध्यम से कम लागत में प्रयोगात्मक अधिगम को प्रभावी बनाने की संभावनाओं तथा भौतिक विज्ञान शिक्षण में इनके व्यावहारिक उपयोग का प्रदर्शन किया।
इस पाँच दिवसीय कार्यक्रम में भारतभर से 30 से अधिक प्रतिभागी सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है।

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