
रिपोर्ट:- उपेन्द्र कुमार पांडेय
आजमगढ़। मोहम्मदपुर विकासखंड के रानीपुर रजमो में कड़कड़ाती धूप हो या मूसलाधार बारिश—हर मौसम में एक महिला सालों से महज़ एक बांस और फटे प्लास्टिक के सहारे अपनी जिंदगी काटने को मजबूर थी। गरीबी और बेबसी के बीच वह महिला हर दिन जीवन से लड़ाई लड़ रही थी।
लेकिन कहते हैं न कि जहां प्रशासनिक उदासीनता खत्म होती है, वहीं से निस्वार्थ जनसेवा का मार्ग प्रशस्त होता है।
अंबिका सेवा संस्थान सामाजिक संगठन के युवाओं ने इस महिला के जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।
घटना तीन दिन पुरानी है, जब अंबिका सेवा संस्थान की टीम रानीपुर रजमो के ग्रामीण इलाके से गुजर रही थी। मूसलाधार बरसात के बीच केवल एक बांस के बल पर टिके प्लास्टिक के नीचे भीगती हुई उस महिला का करुण दृश्य जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देखा, तो उनका दिल पसीज गया।
संस्थान ने बिना एक पल गंवाए यह संकल्प लिया कि इस असहाय महिला को तुरंत राहत पहुंचाई जाएगी।
दो दिन बाद अंबिका सेवा संस्थान के बैनर तले एक विशेष ‘मदद अभियान’ शुरू किया गया।
संस्थान के कार्यकर्ताओं ने गांव पहुंचकर कमर कसी और महज 4 घंटे की कड़ी मेहनत में बल्लियों के सहारे करकट (टिनशेड) की एक मजबूत छत खड़ी कर दी। सालों बाद उस महिला के सिर पर प्लास्टिक की जगह एक सुरक्षित छत नसीब हुई। छत का ढांचा तैयार करने के साथ-साथ टीम ने महिला को जीवन यापन के लिए आवश्यक सामग्रियां भी सौंपी:ओढ़ने के लिए कंबल, पहनने के लिए नई साड़ी व कपड़े। और खाने-पीने की सभी जरूरी सामग्रियां।
जनहितकारी और त्वरित कार्य में टीम के प्रत्येक सदस्य का समर्पण देखने लायक था। इस पूरे राहत अभियान में संस्थान के प्रभारी अभिषेक उपाध्याय, प्रमोद सोनी, पवन अस्थाना, लकी श्रीवास्तव, रिंकू विश्वकर्मा एवं शैलेश प्रजापति की भूमिका अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय रही। इन युवाओं ने अपनी लगन से साबित कर दिया कि समाज सेवा केवल बातों में नहीं, बल्कि धरातल पर उतरकर की जाती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने अंबिका सेवा संस्थान की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। सालों से बेसहारा को कुछ घंटों में एक सुरक्षित सहारा देकर संस्थान ने मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है।

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