
वाराणसी। केन्द्रीय कारागार में रविवार को नवरात्र के प्रथम दिन मुकुट पूजन के साथ दस दिवसीय रामलीला का भव्य शुभारंभ हुआ। पहले दिन बंदियों ने ‘नारद मोह’ प्रसंग का सजीव मंचन किया।
मंचन में दिखाया गया कि कामदेव द्वारा समाधि भंग करने में असफल होने पर देवर्षि नारद को अपनी विजय का अभिमान हो जाता है। भगवान शिव की चेतावनी के बावजूद नारद जी यह बात भगवान विष्णु को बता देते हैं। उनका अहंकार तोड़ने के लिए भगवान माया रचते हैं, जिससे नारद जी राजा शीलनिधि की पुत्री पर मोहित हो जाते हैं। भगवान उन्हें वानर रूप देते हैं, जिससे स्वयं उनकी हंसी उड़ती है। इससे क्रोधित होकर नारद जी विष्णु भगवान को मनुष्य रूप में विरह सहने और वानरों की सहायता लेने का श्राप देते हैं। इसी के साथ भगवान श्रीराम के अवतार की पृष्ठभूमि के साथ पहले दिन की लीला संपन्न हुई। इस अवसर पर जेलर अखिलेश कुमार, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी लक्ष्मीकान्त त्रिपाठी सहित कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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