आत्म-संगीत’ भौतिक वैभव से ऊपर आत्मिक सुख की महत्ता को रेखांकित करती है:- प्रो. श्रद्धानंद

 

​वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही की ओर से आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 2063वें दिवस पर रविवार को प्रेमचंद की कहानी ‘आत्म-संगीत’ का पाठ किया गया। विदूषी सहाना द्वारा किए गए पाठ के बाद ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, निदेशक राजीव गोंड व प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने उन्हें सम्मानित किया। शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। कहानी की समीक्षा करते हुए प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद भौतिक वैभव की अपेक्षा आत्मिक सुख की महत्ता को रेखांकित करते हैं। यह रचना मनुष्य की आंतरिक चेतना और आत्मानुभूति की खोज को प्रस्तुत करती है। डॉ. विद्यासागर ने कहा कि वर्तमान उपभोक्तावादी समाज में यह रचना विशेष प्रासंगिक है, क्योंकि वास्तविक आनंद धन में नहीं बल्कि संवेदनाओं को पहचानने में है। संचालन आयुषी दूबे और स्वागत राहुल यादव ने किया। ​इस अवसर पर डॉ. कैलाश सिंह विकास,विनोद वर्मा, प्रमोद कुमार, प्रतीक श्रीवास्तव, हरेंद्र नाथ मिश्र, सुखमंगल सिंह, तेजस कुमार सिंह, ममता चटर्जी, मधुकर लाल, कुमार महेंद्र, नमन श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, रामजतन पाल, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, समीक्षा त्रिपाठी, विवेक त्रिपाठी, विवेक विश्वकर्मा और आनंद उपस्थित रहे।

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