
वाराणसी। काशी में आयोजित श्री शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा कण्ठस्थ दण्डक्रम पारायण के अंतर्गत आज का आयोजन अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं गरिमामय रहा।
मंगलवार को पारायण में परम आदरणीय रामचंद्र देव गुरुजी का विशेष आगमन हुआ। उन्होंने दण्डक्रम पारायण की पद्धति, उसके उच्चारण एवं वैदिक परंपरा की बारीकियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। साथ ही अष्टविकृति के विभिन्न प्रमाणों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार वैदिक मंत्रों का स्वर, क्रम एवं पाठ-विधान निर्धारित परंपरा के अनुसार संपन्न होता है। उनके मार्गदर्शन से उपस्थित विद्वानों एवं वेदाध्यायियों को महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर वेणुगोपाल जी घनपाठी, वेदमूर्ति वेदप्रकाश चतुर्वेदी गुरुजी, ऋषभ पाण्डेय जी, अक्षय जोशी जी एवं रोहित देव जी का भी गरिमामय आगमन हुआ।
पारायण में वेदाध्यायी अद्वैत शैलेन्द्र काकड़े एवं समर्थ शैलेन्द्र काकड़े ने अत्यंत सुंदर, शुद्ध एवं प्रभावशाली ढंग से दण्डक्रम पारायण प्रस्तुत किया, जिसकी उपस्थित विद्वानों ने सराहना की।
इस संपूर्ण आयोजन में परीक्षक के रूप में वेदभास्कर प्रशांत जोशी गुरुजी एवं वेदमूर्ति किरण पाठक गुरुजी का विशेष मार्गदर्शन एवं निरीक्षण प्राप्त हो रहा है।
कार्यक्रम के संयोजन एवं व्यवस्था में शैलेन्द्र काकड़े जी, गजानन ज्योतकर गुरुजी एवं के वेंकटरमन घनपाठी जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
काशी की पावन धरती पर इस प्रकार का आयोजन वैदिक ज्ञान, गुरु-शिष्य परंपरा एवं मौखिक वेद संरक्षण की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। यह आयोजन दर्शाता है कि गुरुजनों के मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास एवं समर्पण से ही वेदों की शुद्ध एवं प्राचीन पाठ परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखी जा सकती है।

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