पल्लव में नवांकुरों ने किया काव्यपाठ

 

वाराणसी। डीएवी पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग के छात्र मंच पल्लव में मंगलवार को नवांकुर कवियों ने काव्यपाठ कर सबको मोहित कर लिया। नवांकुर कवियों ने स्वरचित रचनाओं के जरिये दायित्व बोध, विद्यार्थी जीवन, काशी का सौंदर्य, श्रृंगार सहित अन्य विषयों पर हृदयस्पर्शी काव्यपाठ किया। बीए के छात्र कौस्तुभ राज ने ‘राजपाठ सब छोड़ कर जा रहा हूं साधना करने’, आलोक रंजन ने ‘जाग रहे हो या सोते रह जाओगे इस स्वर्ण काल मे’, शिवम यादव ने ‘पुत्र एक पिताजी का फर्ज भूल जाता है’ सुनाया। बीए की छात्रा चित्रा मिश्रा ने काशी पर आधारित कविता ‘में बनारस की कोई शाम जीना चाहती हूँ’, संजय यादव ने ‘लहुरी काशी से काशी देव तक’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। निलय प्रशांत ने ‘जबरन हमें नजरअंदाज ना कीजिये’ सुनाया।

वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार द्विवेदी ने ‘मैं महब्बत का समंदर हूँ, जितना बाहर उतना अंदर हूँ’ सुनाकर जमकर तालियां बटोरी। उनके अलावा डॉ. विश्वमौली, डॉ. नीलम सिंह ने भी काव्यपाठ क़िया। अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार राम ने किया। स्वागत डॉ. अस्मिता तिवारी ने किया। संचालन छात्र प्रियांशु प्रियंवद एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्वास तिवारी ने दिया। इस मौके पर रजनीश रौशन, आशुतोष पथिक, गोविंद गौरव पाण्डेय, ऋषभ शंकर सिंह सहित 2 दर्जन से अधिक नवांकुर कवियों ने काव्यपाठ किया।

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