
तीर्थ यात्राओं के कारण ही एक राष्ट्र के रूप में अमर और अडिग रहा है भारत-मोदी
पीएम मोदी ने काशी तमिल संगमम् एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी
प्राचीन तमिल ग्रंथों का ब्रेल भाषा में अनुवाद किये गये पुस्तकों का विमोचन किया
एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत कर रहा काशी तमिल संगमम
साउथ से आए शास्त्री पंडितों ने प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया
“काशी में बसता है लघु तमिलनाडु”
“दो संस्कृतियों के मिलन से खुलेंगे एकात्मकता के नए द्वार”
तमिल कार्तिक माह में काशी तमिल संगमम का यह आयोजन प्रधानमंत्री के विजन का परिणाम है-मुख्यमंत्री
काशी तमिल संगमम के माध्यम से एक नई विरासत को जीवंत कर दिया है-योगी आदित्यनाथ
काशी तमिल संगमम ने एक नई विरासत को जीवंत कर दिया-धर्मेन्द्र प्रधान
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 से 30 दिसंबर तक वाराणसी में चलने वाले ‘काशी तमिल संगमम’ महाआयोजन के द्वितीय चरण का शुभारंभ/उद्घाटन रविवार को पवित्र तमिल महीने मार्गेई के पहले दिन देश-दुनिया में बहुचर्चित गंगा के नमो घाट पर
रिमोट का बटन दबाकर किया। इस दौरान हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। इससे पूर्व मंच पर साउथ से आए शास्त्री पंडितों ने प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वणक्कम काशी, वणक्कम तमिलनाडु से अपनी बात शुरू करते हुए तमिलनाडु से वाराणसी आये लोगों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। काशीवासी एवं तमिलनाडु के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करने और भारत की एकता और विविधता का जिक्र करते हुए समागम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने काशी आने का मतलब समझते हुए कहा, “तमिलनाडु से काशी आने का मतलब है, महादेव के एक घर से दूसरे घर आना। तमिलनाडु से काशी आने का मतलब है मदुरै मीनाक्षी के यहां से काशी विशालाक्षी के यहां आना। इसलिए तमिलनाडु और काशीवासियों के बीच जो प्रेम है, जो संबंध है वो अलग भी है और अद्वितीय भी है। मुझे विश्वास है काशी के लोग आप सभी की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ रहे होंगे। आप जब यहां से जाएंगे तो बाबा काशीविश्वनाथ के आशीर्वाद के साथ-साथ काशी का स्वाद, काशी की संस्कृति और काशी की स्मृतियां भी ले जाएंगे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी और तमिलनाडु के रिश्ते प्राचीन होने के साथ ही भावनात्मक और रचनात्मक हैं। दुनिया के दूसरे देशों में राष्ट्र एक राजनीतिक परिभाषा रही है, लेकिन भारत एक राष्ट्र के रूप में आध्यात्मिक आस्थाओं से भरा है। भारत को एक बनाया है आदि शंकराचार्य और रामानुजाचार्य जैसे संतों ने, जिन्होंने अपनी यात्राओं से भारत की राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया। सदियों से अधीनम संत काशी की यात्रा करते रहे हैं। इन यात्राओं और तीर्थ यात्राओं के जरिए भारत हजारों साल से एक राष्ट्र के रूप में अडिग रहा है, अमर रहा है। काशी तमिल संगमम इसी एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी तमिल संगमम विभिन्न वर्गों के बीच आपसी संवाद और संपर्क का प्रभावी मंच बना है। इस संगमम को सफल बनाने के लिए बीएचयू और आईआईटी मद्रास भी साथ आए हैं। आईआईटी मद्रास ने बनारस के हजारों छात्रों को मैथ्स में ऑनलाइन सपोर्ट देने के लिए विद्या शक्ति इनिशिएटिव शुरू किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की ये भावना उस समय भी नजर आई जब हमने संसद के नये भवन में प्रवेश किया। नये संसद में पवित्र सेंगोल की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि हम भारतवासी एक होते हुए भी बोलियां, भाषाओं, वेशभूषा, खानपान रहन-सहन जैसी विविधता से भरे हैं। भारत की विविधता उस आध्यात्मिक चेतना में रची बसी है, जिसके लिए तमिल में कहा गया है कि हर जल गंगाजल है और भारत का हर भूभाग काशी है। जब उत्तर में आक्रांताओं द्वारा हमारी आस्था के केंद्र काशी पर आक्रमण हो रहे थे तब राजा पराक्रम पांडेयन ने तेनकाशी और शिवकाशी में यह कहकर मंदिरों का निर्माण कराया कि काशी को मिटाया नहीं जा सकता। आप दुनिया की कोई भी सभ्यता देख लीजिए। विविधता में आत्मीयता का ऐसा सहज और श्रेष्ठ स्वरूप आपको शायद ही कहीं मिलेगा। हाल ही में जी20 समिट के दौरान दुनिया भारत की इस विविधता को देखकर चकित थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी तमिल संगमम के जरिए देश के युवाओं में अपनी प्राचीन परंपराओं के प्रति उत्साह बढ़ा है। तमिलनाडु से बड़ी संख्या में युवा काशी आ रहे हैं। काशी तमिल संगमम में आने वाले लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अयोध्या में दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री ने काशी और मदुरै का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों महान मंदिरों के शहर हैं। दोनों महान तीर्थस्थल हैं। मदुरै वैगई के तट और काशी गंगई के तट पर। तमिल साहित्य में वैगई और गंगई दोनों के बारे में लिखा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि काशी तमिल संगमम का ये संगम इसी तरह हमारी विरासत को सशक्त करता रहेगा और एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत बनाता रहेगा।
इससे पहले उन्होंने प्राचीन तमिल ग्रंथों का ब्रेल भाषा में अनुवाद किये गये विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया। वहीं इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी तमिल संगमम एक्सप्रेस ट्रेन को काशी से हरी झंडी दिखाकर कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन से रवाना किया। ये साप्ताहिक ट्रेन कन्याकुमारी से वाराणसी के बीच सीधी रेल सेवा के रूप में शुरू की गई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेश्वर की पावन धरा पर रामेश्वरम से पधारे तमिलनाडु के अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा तमिल कार्तिक माह में काशी तमिल संगमम का यह आयोजन प्रधानमंत्री के विजन का परिणाम है। इससे दक्षिण से उत्तर का अद्भुत संगम हो रहा है। इस आयोजन की परिकल्पना माध्यम से एक भारत श्रेष्ठ भारत की चेतना को जागृत करते हुए प्रधानमंत्री ने एक बड़े अभियान को आगे बढ़ाया है। उन्होने कहा कि आये सभी अतिथि बनारस में भ्रमण के उपरांत प्रयागराज तथा अयोध्या का दर्शन करेंगे।काशी व रामेश्वरम के बीच प्राचीन समय से संबंध रहा है। पिछले एक वर्षों में दक्षिण से बनारस आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। काशी तथा तमिलनाडु संस्कृति, ज्ञान, कला तथा साहित्य का केंद्र रहा है। समावेशी संस्कृति का यह भाव समाज में समरसता बनाए हुए है। इससे हमारी संस्कृति को एक नया आयाम भी मिलेगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार जताया।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “आज इस पवित्र नमो घाट पर काशी नगरी में काशी-तमिल संगमम का द्वितीय संस्करण शुरू हो रहा है। वाराणसी इतिहास से भी पुराना है। ये एक ऐसी सभ्यता है जो संपन्न और अद्वितीय है। काशी तमिल संगमम के माध्यम से एक नई विरासत को जीवंत कर दिया है। साथ ही एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार कर रहा है। धमेंद्र प्रधान के कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने हमारे सांस्कृतिक विरासत एवं धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार सभी के आत्माओं एवं आकांक्षाओं को फिर से जीवंत कर दिया है। वर्ष 2014 के बाद से इतिहास को बड़े पैमाने पर पुनर्जीवित किया गया है। यह हर दिन नए स्वरूप में हमारे सामने आ रहा है। एक भारत श्रेष्ठ भारत के साथ पिछले साल हमने काशी तमिल संगम के पहले संस्करण को किया था। आज काशी के नमो घाट पर द्वितीय संस्करण काशी तमिल संगम का शुभारंभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का उद्देश्य है कि सभी देश की भाषा हमारी राष्ट्रीय भाषा है।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि तमिल बहुत पुराना भाषा है। उन्होंने कहा कि आपने इस समाज के लिए बहुत बड़ा आवास दिया है। उन्होंने कहा कि तमिल को बढ़ाने के लिए एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना के साथ अपने काशी तमिल संगम की शुरुआत की। इस शुरुआत के लिए तमिल के तरफ से उन्होने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने नमो घाट पर उत्तर दक्षिण की कला व संस्कृति सहित को तमिलनाडु और संस्कृति, हथकरघा, व्यंजन और अन्य विशेष उत्पादों को यहां प्रदर्शित करने के लिए लगाए गए 51 स्टालो के अलावा केंद्रीय संचार ब्यूरो, सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार व लखनऊ की ओर से हमारा संकल्प भारत, काशी एवं तमिल संस्कृति, तमिल स्वतंत्रता आंदोलन विषयक लगायी गयी चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु से आए लोगों के साथ फोटो भी खिंचवाई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु से जुड़े विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी भव्य आयोजन हुआ।
इसके पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया।
इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री एल मुरुगन, पूर्व केंद्रीय मंत्री पोन राधाकृष्णन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि सदियों से भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से काशी और तमिलनाडु एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इन रागात्मक संबंधों ने समृद्ध धार्मिक और व्यापारिक संबंधों को फलित किया। एक लंबे कालखंड में विकसित हुए इन एकात्मता सूत्रों का भौतिक रूप में प्रकटीकरण है काशी-तमिल संगमम। हजारों वर्षों के पड़ावों से गुजरे सांस्कृतिक उत्कर्ष का यह आयोजन न सिर्फ सुदूर बसे दो राज्यों को एक-दूसरे के निकट लाने वाला विहंगम आयोजन सिद्ध हो रहा हैं, बल्कि नई पीढ़ी से लेकर संपूर्ण विश्व भर में फैले भारतवंशियों में भी एक-दूसरे की संस्कृति के बारे में जानने की उत्सुकता उत्पन्न कर रहा हैं। 17 से 30 दिसंबर तक चलने वाले इस महाआयोजन का शुभारंभ काशी के सांसद एवं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पवित्र तमिल महीने मार्गेई के पहले दिन देश-दुनिया में बहुचर्चित गंगा के नमो घाट पर किया।
चेन्नई से वहां के 200 छात्रों का दल गंगा प्रस्थान कर रविवार को अलसुबह काशी पहुंचा। बताते चले कि जीवन में एक बार काशी की धार्मिक यात्रा कर भगवान विश्वेश्वर का दर्शन और गंगा स्नान हर तमिल के जीवन का लक्ष्य होता है। इसी भावना के वशीभूत प्राचीन काल से लोग तमिलनाडु व दक्षिण के अन्य राज्यों से काशी आते रहे हैं। बहुत से लोग यहां आए तो यहीं बस गए। शैव-वैष्णव परंपरानुसार माथे पर सफेद तिलक लगाए, मुंडु धारण किए पुरुष, विशिष्ट शैली में धोतियां पहनीं स्त्रियां, प्रत्येक घर के बाहर रंगोली तो अंदर दक्षिण भारतीय शैली में मंदिर, मुहल्लों में दउरा सिर पर लिए कदली पात, कदली खंभव कदली पुष्प बेचते फेरी वाले, घरों से आती साभर रसम की खुशबू। आपस में तमिल बोलते लोग, दुकानों पर बिकते तमिल व्यंजनों के मसाले और खाद्य पदार्थ, यह वातावरण शहर के हनुमान घाट से केदार घाट तक आम है, जो काशी में तमिलनाडु का लघु रूप प्रदर्शित करते हैं।
संगमम में इस बार 1400 से अधिक प्रतिनिधि सात समूहों में आएंगे। इनके नाम पवित्र सात नदियों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें छात्र (गंगा), शिक्षक (यमुना), पेशेवर (गोदावरी), आध्यात्मिक (सरस्वती), किसान और कारीगर (नर्मदा), लेखक (सिंधु) और व्यापारी और व्यवसायी (कावेरी) शामिल हैं। ये प्रतिनिधिमंडल चेन्नई, कोयंबटूर और कन्याकुमारी से काशी आ रहे। प्रथम जत्था रविवार को अलसुबह काशी आ गया। इस बार इस आयोजन में पुडुचेरी के लोग भी होंगे।काशी तमिल संगमम में आये प्रतिनिधिमंडल अपनी यात्रा के दौरान वाराणसी के साथ प्रयागराज और अयोध्या की भी यात्रा करेगा।
