वाराणसी। डीएवी पीजी कालेज के दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में बुधवार को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर श्रीप्रकाश पाण्डेय ने ‘भारतीय ज्ञान – परम्परा के उदभव और विकास’ विषय पर विचार प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान की समग्रता पर प्रकाश डाला। इस क्रम में उन्होंने पाश्चत्य ज्ञान परम्परा और भारतीय ज्ञान परम्परा के बीच के अंतर को रेखांकित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रारंभ से लेकर अद्यपर्यन्त समन्वयित दृष्टि की विषद विवेचना की। इसी क्रम में भक्ति कालीन संतों की नीर -क्षीर विवेकिनी दृष्टि के महत्व को भी वक्ता ने रुपायित किया। महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य प्रो. सत्यगोपाल जी ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए उनका मार्गदर्शन किया। अतिथि का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक है जिसमे ज्ञान और विज्ञान, लौकिक और पारलौकिक, कर्म और धर्म तथा भोग और त्याग का अद्भुत समन्वय है। संचालन एवं विषय- प्रवर्तन डॉ. रामेंद्र सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सतीश कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर विभाग के डॉ. संजीव वीर सिंह प्रियदर्शी तथा डॉ. विश्रुत द्विवेदी ने भी विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. इंद्रजीत मिश्रा, इतिहास विभाग के डॉ. संजय कुमार सिंह तथा प्राचीन इतिहास विभाग के डॉ. ओम प्रकाश कुमार सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय के छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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