
निबंध में ईशांत, भाषण में कुन्दन एवं कण्ठस्थ श्लोक में आदित्य रहे प्रथम
वाराणसी। डीएवी पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में तीन दिवसीय गीता जयंती समारोह के अंतर्गत विविध प्रतियोगिता आयोजित हुई। शनिवार को पुरस्कार वितरण समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गयं विजेताओं को मुख्य वक्ता प्रख्यात विदुषी सुश्री लक्ष्मीमणि शास्त्री, मुख्य अतिथि महाविद्यालय के मंत्री/प्रबंधक अजीत कुमार सिंह यादव एवं कार्यकारी प्राचार्य प्रो. सत्यगोपाल जी ने विजेताओं को भगवत गीता प्रदान कर पुरस्कृत किया। निबंध प्रतियोगिता में ईशांत त्रिपाठी प्रथम पुरस्कार, श्रेया शुक्ला द्वितीय पुरस्कार, सत्यम पाण्डेय तृतीय पुरस्कार एवं मनीष पाण्डेय को प्रोत्साहन पुरस्कार मिला। भाषण प्रतियोगिता में कुंदन कुमार उपाध्याय प्रथम रहे, द्वितीय स्थान पर प्रियांशु शुक्ला, तृतीय स्थान पर शिवांग पाल एवं विश्वास तिवारी को प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुआ। वहीं कण्ठस्थ श्लोक पाठ प्रतियोगिता में आदित्य त्रिपाठी प्रथम, कुलदीप पाण्डेय द्वितीय, संदीप रवनाल तृतीय एवं साकेत वत्स को प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर ‘वर्तमान काल में श्रीमदभागवत गीता की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्यवक्ता प्रख्यात विदुषी सुश्री लक्ष्मीमणि शास्त्री ने कहा कि भगवत गीता में ज्ञान, कर्म और भक्ति योग की प्रधानता बतायी गयी है। अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया और वह गीता आज भी प्रत्येक जनमानस के लिए प्रासंगिक बनी हुई है। गीता आधि और व्याधि दोनों को दूर करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ गीता पढ़ने से जीवन नही बदल सकता है, जीवन मे सार्थक परिवर्तन चाहिए तो गीता को जीवन मे उतारना होगा।
अध्यक्षता करते हुए कार्यकारी प्राचार्य प्रो. सत्यगोपाल जी ने कहा कि ज्ञान से समर्पण की यात्रा का नाम ही भगवद गीता है। मनुष्य के आत्मावलोकन के लिए भगवद गीता से श्रेष्ठ कोई और ग्रंथ नही है। मानव में आज जितने तनाव है उन्हें दूर करने का सबसे बड़ा उपाय गीता में ही निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि गीता कोई धर्मग्रन्थ नही बल्कि यह प्रत्येक मनुष्य के लिए आध्यात्मिकता का बोध कराने का माध्यम है।
इसके पूर्व मुख्य वक्ता का स्वागत अजीत कुमार सिंह यादव एवं प्रो. सत्यगोपाल जी ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर स्वागत किया। विभागाध्यक्ष प्रो. मिश्रीलाल ने स्वागत उद्धबोधन, संचालन डॉ. दीपक कुमार शर्मा एवं धन्यवाद प्रो. पूनम सिंह ने दिया। इस मौके पर मुख्य रूप से प्रो. अनूप कुमार।मिश्रा, प्रो. सतीश कुमार सिंह, डॉ. हबीबुल्लाह, डॉ. संगीता जैन, डॉ. संजय सिंह, डॉ. त्रिपुरसुंदरी, डॉ. रंगनाथ मिश्रा, डॉ. अमित मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
