
मुंशी प्रेमचंद की मानवीय संवेदन कहानी ‘पागल हाथी’ प्रेम और दोस्ती की सुंदर मिसाल पेश करती है। इस कहानी को शुरू में सुनते हुए तो बड़ी सामान्य सी महसूस होती है, लेकिन खतम होते हुए भावुक कर जाती है। और हमें ये बताती है, कि प्रेम और अच्छे व्यवहार से शैतान भी शांत किया जा सकता है, उसको भरोसा दिलाया जा सकता है. सभी को प्रेम और भरोसा ही चाहिए, जहां प्रेम और भरोसा नहीं होता, वहां नफरत होती है जो एक तरह के डर पैदा होती है, लेकिन अगर मन साफ है, तो सच्चे मन की आवाज़ सच्चे मन तक पहुंचती है। उक्त कथन संस्कृति विभाग उप्र व जिला प्रशासन वाराणसी की प्ररेणा से मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट, लमही द्वारा आयोजित दैनिक कार्यक्रम सुनों मैं प्रेमचंद के 1042 दिन पूरे होने पर संस्था के निदेशक राजीव गोंड ने कहा। प्रेमचंद जी की कहानी पागल हाथी का पाठन सुर्यभान सिंह द्वारा किया गया। जिनका सम्मान ट्रस्ट के संरक्षक प्रकाश चंद श्रीवास्तव ने किया और कहा कि कहानी बहुत ही सहज, सरल और दिलचस्प है। आसान भाषा में लिखी गई ये कहानी अंत तक रोचक बनी रही है। कहानी राजा के पागल हो चुके हाथी और मुरली नाम के बच्चे की है, जो प्रेम, बहादुरी और सूझ-बूझ से एक पागल हाथी को अपने नियंत्रण में लेता है. कहानी छोटी है, कुछ पंक्तियों में खतम हो जाती है, लेकिन थोड़े में ही गहरा संदेश देती है। इस कार्यक्रम में व्योमेश, अजय यादव, राम अचल, देव बाबू, राहुल, विनोद कुमार, विकास कुमार, विश्वास त्रिपाठी सहित क्षेत्रीय ग्रामीण व साहित्य प्रेमी उपस्थित होकर कहानी सुने। सभी का स्वागत मनोज विश्वकर्मा ने किया और धंयवाद ज्ञापन राजेश श्रीवास्तव ने किया।
