वाराणसी। बच्चों में कुपोषण कम करने के लिए सामाजिक जागरूकता एक महत्वपूर्ण कारक है, जिसे समुदाय आधारित गतिविधियां जैसे गोद भराई, अन्नप्राशन, किशोरी दिवस, ममता दिवस आदि के आयोजन से हासिल किया जा सकता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोद भराई और अन्नप्राशन नियत तिथि पर विधिवत आयोजित किया जाए और उसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जाए तथा पोषण संबंधी संदेश दिया जाए।

उक्त बातें जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने बुधवार को जिला राइफल क्लब सभागार में आयोजित जिला पोषण समिति की बैठक के दौरान बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देशित करते हुए निर्देश कही। बैठक में पोषण ट्रैकर के विभिन्न घटकों की समीक्षा में पाया गया कि समुदाय आधारित गतिविधियों की फीडिंग जिले में 77 फीसदी है, जिस पर बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लक्ष्य के अनुसार शत-प्रतिशत गतिविधियों की फीडिंग पोषण ट्रैकर पर की जाए। बाल विकास परियोजना अधिकारी बड़ागांव द्वारा मात्र 57 फीसदी गतिविधियों की फीडिंग पोषण ट्रैकर पर की गई, जिसके कारण उनका माह दिसंबर का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। बैठक में सैम बच्चों के स्वास्थ्य सुधार हेतु पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किए जाने और उनके परिवारों को अन्य सरकारी योजना का लाभ दिलवाने के साथ-साथ महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित कन्या सुमंगला योजना मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना तथा स्पॉन्सरशिप योजना में सीडीपीओ को दिए गए लक्ष्य की समीक्षा की गई और 31 दिसंबर तक लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय राय, जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह, जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त मनरेगा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला आपूर्ति अधिकारी एवं समस्त बाल विकास परियोजना अधिकारी उपस्थित रहे।

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