वाराणसी। काशी-तमिल संगमम के द्वितीय संस्करण के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की 13वीं संध्या पर काशी और तमिलनाडु के नौ सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। शनिवार की शाम काशी और तमिलनाडुके शास्त्रीय और लोक नृत्य, लोक गायन और वाद्य वादन आदि प्रस्तुतियों ने नमो घाट को मंत्रमुग्ध कर दिया। मां गंगा के तट पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाकर समस्त डेलीगेट्स काफी मुग्ध नजर आए। काशी तमिल संगमम के द्वितीय संस्करण के सांस्कृतिक संध्या का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज एवं दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र तंजावूर, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा किया गया है।

बीएचयू की डॉ. विधि नागर के कथक की भाव-भंगिमा और घूंघुराओं की झन्कार से लोगों को मुग्ध कर दिया। एस अरुण कुमार और टीम ने सकाकू चियट्टम, मान कोबट्टम और थपट्टम पर प्रस्तुति दी। कलाई मणि और टीम ने नैयांडिमेलम पर मनमोहक प्रस्तुति दी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो. राजेश शाह और उनकी वाद्य यंत्रों की टीम ने वाद्य यंत्रों की ध्वनि से नमो घाट को संगीतमय कर दिया। हर कोई यहां झूमता नजर आया। पी श्रवणन और उनकी टीम ने भरतनाट्यम, प्रो. प्रेमचंद होंबल और टीम ने नृत्य की प्रस्तुति दी। कलाईमणि, नूगरकानी, सलेम ने डमी हॉर्स, पीकॉक और बुल डांस करके लोगों का काफी मनोरंजन किया। वाराणसी से डॉ. कुमार अंबरीश चंचल और टीम ने गायन की प्रस्तुत ऐसी दी कि पूरा नमो घाट का माहौल भक्तिमय हो गया। जे भारत और टीम ने सिलामपट्टम और एम माथियालगन ने थपट्टम पर प्रस्तुति देकर लोगों को मुग्ध कर दिया।

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