
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी शती के साहित्य का मार्गदर्शन किया। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक थे। यह बातें मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही की ओर से दैनिक कार्यक्रम सुनों मैं प्रेमचंद के 1049 दिन पूरे होने पर संस्था के निदेशक राजीव गोंड ने कहा। प्रेमचंद की कहानी नाग पूजा का पाठ कवयित्री विदिशा चित्रवंश ने किया। उनका सम्मान ट्रस्ट के संरक्षक प्रकाश चंद श्रीवास्तव ने किया इस कार्यक्रम में मेवालाल श्रीमाली, राकेश वर्धन, अजय यादव,डा व्योमेश चित्रवंश, अजय श्रीवास्तव, राम अचल, देव बाबू, राहुल, चंदन कुमार, सचिन, शुभम पाण्डेय, विनोद कुमार, विकास कुमार, विवेक विश्वकर्मा, विश्वास त्रिपाठी थे। स्वागत प्रमोद मौर्य,धन्यवाद ज्ञापन मनोज विश्वकर्मा ने किया।
