वाराणसी।काशी पंचकोसी परिक्रमा के चौथे पड़ाव के रूप में मशहूर शिवपुर पंचकोशी मार्ग स्थित ऐतिहासिक महत्व के धार्मिक तालाब (जिसका अराजी नं० 69 मौजा एवं परगना शिवपुर तहसील सदर वाराणसी ) इस तालाब पर जहां माता जिउतिया का पूजन एवं प्रसिद्ध प्याला का मेला लगता था वही पंचकोसी परिक्रमा करने वाले यात्री खाना बनाकर, खाकर , वही विश्राम करके पुनः अपने अगले पड़ाव को प्रस्थान करते थेl यह तालाब सैकड़ो पेड़ों से आच्छादित था, तालाब में तमाम जलचर जीव जंतु थे, पशु /पक्षियों का घरौंदा हुआ करता था, आस पास के पुराने लोग बताते है कि कभी यहां साइबेरियन पंछी भी आती थी, वर्ष पर्यन्त यह तालाब जल से भरा रहता थाl

ऐसे जीवंत सार्वजनिक तालाब को पहले अवैध कब्जेदारी ने धारा 229 B. कराकर भ्रष्ट अधिकारियों /कर्मचारियों की मिली भगत से अपना नाम कपट पूर्वक दर्ज कराकर जब उसे मिट्टी डालकर पाटा जाने लगा तो आस पास के क्षेत्रीय नागरिकों ने इसका पुरजोर विरोध कियाl

यह मामला सड़क से लेकर नगर निगम सदन तक उठाया गया , जन – आंदोलन के तहत कई बार धरना – प्रदर्शन हुए मामला जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश शासन के संज्ञान में लाया गया, परंतु भू माफियाओं ने पुनः भ्रष्ट्र अधिकारियों / कर्मचारियों की मिली भगत से नगर निगम वाराणसी द्वारा तालाब की भूमि पर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करा लिया एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा भू – विन्यास मानचित्र भी स्वीकृत कराने में वह सफल हो गएl

मैं आंखों में आंसू लिए माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद का दरवाजा खटखटाया वहां मेरी याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर वाराणसी मंडल के तत्कालीन मंडल आयुक्त द्वारा गठित जिलाधिकारी वाराणसी, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण वाराणसी, नगर आयुक्त नगर निगम वाराणसी एवं अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) की चार सदस्यीय समिति से मौके एवम अभिलेखों की जांच कराई गईl

जांच के बाद समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि सन 1291 फसली (यानी सन 1883- 84) में गाटा संख्या 69 तालाब के रूप में दर्ज था, इससे यह प्रतीत होता है उक्त गाटे पर उपर्युक्त व्यक्तियों ने दिनांक 23/1/1990 को प्रश्नगत आदेश पारित होने के पूर्व अभिलेखों में अपना नाम कपट पूर्वक दर्ज करा लिया है अतः इसे निरस्त कर पुनः तालाब के रूप में दर्ज किया जाना आवश्यक हैl

जांच समिति ने आगे कहा कि प्रश्नगत गाटा संख्या तालाब की भूमि है अतः इसका स्वरूप किसी भी दशा में परिवर्तित नहीं किया जा सकता हैl तात्कालीन सहायक कलेक्टर (प्रथम श्रेणी) अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय वाराणसी द्वारा दिनांक 23/1/1990को पारित उक्त निर्णय उनके क्षेत्राधिकार के परे है यह जांच रिपोर्ट दिनांक 26/5/2006 की है जिसे सभी अधिकारियों से हस्ताक्षरित होकर मंडल- आयुक्त को प्रेषित किया गया था इसके बाद नगर निगम द्वारा अपने राजस्व अभिलेख में तालाब दर्ज करने के पश्चात पूर्व में जारी अनापत्ति प्रमाण (NOC) पत्र एवं विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत मानचित्र को भी निरस्त कर दिया गयाl

सार्वजनिक तालाब पाट कर उसके स्वरूप को परिवर्तित करने वालों के खिलाफ तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीमती वीणा के निर्देश पर मुख्य राजस्व अधिकारी वाराणसी की ओर से मेसर्स अलका कंस्ट्रक्शन के खिलाफ एवं अन्य अवैध कब्ज्जेदारो के खिलाफ शिवपुर थाना में दिनांक 20/4/2008 को FIR भी दर्ज कराई गई थीl

सन 2002 से अनवरत जारी संघर्ष की ही उपलब्धि रही है कि तत्कालीन मंडलायुक्त श्री नितिन रमेश गोकर्ण के निर्देश पर पाटे गए तालाब पर दो-दो जेसीबी लगाकर खुदाई( खनन) का कार्य प्रारंभ कराया गया , परंतु राजनीतिक हस्तक्षेप से खुदाई का कार्य अचानक बीच में ही रोक दी गई?

यह तालाब नगर निगम वाराणसी की 63 तालाबों की सूची में 31वे में नंबर पर अंकित है, नगर निगम की संपत्ति रजिस्टर में भी यह तालाब दर्ज है,यह तालाब बंदोबस्त के नक्शे में भी अंकित है जन – विरोध के फल स्वरुप अवैध कबजेदारों ने इस तालाब को मिट्टी से पाट अवश्य दिया है परंतु उसे पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं हो पाया हैl

इस सार्वजनिक तालाब को भूमाफियाओं ने भारी लाभ कमाने के जी नापाक इरादे से तालाब को पाठ कर उसे पर कब्जा कर करने का मंसूबा पाल रखे है वह कभी पूरा नहीं होगा, पौराणिक धार्मिक महत्व के उक्त तालाब को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने के लिए पुनः एक खूबसूरत जलाशय (तालाब) का निर्माण (रीस्टोरेशन आफ वॉटर बॉडी) करवाने की मांग डा जितेन्द्र सेठ ने काशी के सांसद भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री जी के संसदीय कार्यलय, माननीय मुख्यमंत्री जी, नगर विकास मंत्री को रजिस्ट्री डाक द्वारा पत्र प्रेषित करने के साथ ही जिला प्रशासन एवम नगर निगम वाराणसी से विभिन्न प्रतिनिधि मंडलों द्वारा मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंप कर किया गया है

डा जितेन्द्र सेठ ने कहना है कि इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक तालाब की लडाई सर्व समाज के हित के लिए हम लोग लड़ रहे है मेरा उसमे कोई निहित स्वार्थ नही हैl सामाजिक कार्य करने वाले जन प्रतिनिधि के खिलाफ षड्यंत्र करके, अनर्गल दबाव बनाकर फसाने की कोशिश की जायेगी तो मेरा एवम मेरे परिवार का मानसिक तनाव मे आना स्वाभाविक है साथ ही इस बात का पूर्व अंदेशा है की गैर जनपद मे फर्जी आधार पर मेरे खिलाफ FIR दर्ज करने वाले व्यक्ति मुझे जान से मारने की साजिश भी कर सकते हैंl यह संघर्ष आपके जन सहयोग एवं जन समर्थन से ही हम लोग लड़ रहे हैं हमें इस पुनीत कार्य में सफलता मिले आपके स्नेह व आशीर्वाद का आकांक्षी हूं

डॉ०जितेंद्र सेठपूर्व पार्षद/ पूर्व सदस्य,उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी

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