
भारत के पूर्नजागरण हेतु ज्ञान की समृद्ध परंपरा को गुरुकुल प्रणाली से जोड़े : प्रो हरिकेश सिंह
वाराणसी। आज उन्मेष (प्रज्ञा प्रवाह का वैचारिक संगठन) काशी प्रांत के द्वारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संबोधी सभागार में राष्ट्र, राष्ट्रीयता और मालवीय जी पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रामाशीष सिंह ने अपने उद्बोधन में भारत में विविधता के मध्य एकता को सूत्रपात करते हुए राम और कृष्ण के प्रशासकीय सुगमताओं को लागू करने का सुझाव दिया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति प्रो.हरिकेश सिंह ने कहा कि, भारत को ज्ञान और संपदा से समृद्ध बनाने हेतु सनातनी प्रबंधन प्रणाली को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने भारत के पूर्नजागरण हेतु ज्ञान की समृद्ध परंपरा को गुरुकुल प्रणाली से जोड़ने का सुझाव भी दिया। बीएचू राजनीति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि राष्ट्र प्रेम तथा भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट निष्ठा के आदर्श पं० मदन मोहन मालवीय जी सदैव उन कोशिशों में लगे रहे। जो राष्ट्रभक्त और निष्ठावान युवाओं की असीमित शक्ति से इस भारतवर्ष को समृद्ध करें।
अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों में पठन – पाठन का उत्साहजनक वातावरण बनाने हेतु पुस्तकालय में नियमित ज्ञानार्जन आवश्यक है। संचालन डॉ. शांतनु सौरभ ने किया। इस अवसर पर प्रो. एचके सिंह, डॉ. अशोक सोनकर, डॉ.लाल बाबू जायसवाल, प्रशांत शाही, रणधीर, सनी, राजकुमार, मान, नीरज, दिव्यपानी, विशाल और सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित रहे ।
