
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट, लमही द्वारा सुनों मैं प्रेमचंद के 1056 दिन पूरे होने पर निदेशक राजीव गोंड ने कहा कि दुनिया का हर जीव भौतिक रूप से सारी मेहनत खाने के लिए ही करता है। इंसान की भी यही चाहत होती है कि सुबह उठकर खाना मिल जाए और शाम को भूखा न सोना पड़े। जिस व्यक्ति को यह स्पष्ट नहीं है कि सुबह उठने के बाद भोजन मिल जाएगा और सोने से पहले भोजन मिल जाएगा । लेकिन यह आता कहा से है हमें प्रतिदिन भोजन मिले इसके लिए किसान भाई दिन रात खेतों में मेहनत करते रहते हैं। ताकि मुझे भोजन मिल जाए। प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी “पूस की रात” में किसान पूरे समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वह किसान जो पूरे समाज की प्राथमिक आवश्यकता पूरी करने के लिए मेहनत करता है। वह खुद कितने कष्टों में रहता है। खेती करने वाला किसान खेती ना करे तो नौकरीपेशा व्यक्ति कितनी भी मेहनत कर ले उसे भोजन प्राप्त नहीं हो सकता। परिणाम स्वरूप यह कहा जा सकता है कि किसान का स्थान विशेष है। प्रेमचंद जी की कहानी पूस की रात का पाठन वरिष्ठ रंगकर्मी पीयूष मोहन गौड़ ने किया। इस अवसर पर अजय यादव,ओम कृष्ण पाण्डेय, मेवालाल श्रीमाली, राम अचल, देव बाबू, सचिन, विनोद कुमार, विकास कुमार, विवेक विश्वकर्मा, विश्वास त्रिपाठी, राजेश श्रीवास्तव, मनोज विश्वकर्मा आदि थे।
