
रिपोर्ट उपेंद्र पाण्डेय, आजमगढ़
भारतीय सनातन धर्म में प्राचीन काल से, लोगों का मानना है कि वर वधु की खुशी के लिए विवाह हमेशा एक शुभ मुहूर्त दिन और समय पर किया जाना चाहिए। यह संभवतः सबसे पुराने अनुष्ठानों में से एक है जिसे आज तक व्यापक रूप से सम्मान दिया जाता है।
फूलपुर प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पं ऋषिकेश शुक्ल ने संवाददाता को बताया कि नववर्ष 2024 शुरू हो गया है ऐसे में शादी -विवाह जैसे बड़े अनुष्ठान को सफल बनाने के लिए पहले से कुंडली मिलान किया जाता है। और शादी का शुभ मुहूर्त विचारा जाता है। जब शादी उसी मुहूर्त में की जाती है तब शादी को पूर्ण और सफल माना जाता है। और नव दम्पति के जीवन कभी समस्या नहीं आता है ।
हमारे धर्म शास्त्रों में मान्यता है कि शादी यदि शुभ मुहूर्त और ज्योतिष के नियमों को ध्यान में रखते हुए की जाती है तो जीवन में सदैव समृद्धि बनी रहती है।और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है
खरमास 15 जनवरी को समाप्त हो रहा है उसके अगले दिन यानी 16 जनवरी से ही विवाह मुहूर्त आरंभ हो जाएंगे। जनवरी माह में इस बार विवाह के 9 मुहूर्त हैं। फ़रवरी माह 16 विवाह मुहूर्त है मार्च 07 मुहुर्त है अप्रैल में 06 मुहूर्त फिर शुक्र पूर्व अस्त होने से मई, जून, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीने में विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है ।
कारण यह है कि विवाह में शुक्र ग्रह का उदय रहना वैवाहिक जीवन के आवश्यक होता है इस महीने आप शादी की योजना न बनाएं पुनः जुलाई 2024 शुक्र ग्रह उदय होंगे लेकिन 22जुलाई 2024से श्रावण मास लग जाने से विवाह नहीं होगा और 18जुलाई 2024से भगवान विष्णु शयनोत्सव में चले जायेंगे 12 नवम्बर 2024 से हरि प्रबोधिनी एकादशी से शुभ विवाह प्रारंभ हो जायेगा। अतः नवंबर दिसंबर 2024 में विवाह का शुभ मुहूर्त मिलेगा।
