
वाराणसी। डीएवी पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में गुरुवार को छात्राभिवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘भारतीय चिकित्सा शास्त्र में संस्कृत अध्येताओं के लिए संभावनाएं’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार जोशी ने विचार व्यक्त किया। प्रो.जोशी ने कहा कि आयुर्वेद का प्रभाव व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक रहता है। आयुर्वेद में आयु जीवन को दर्शाता है तो वेद ज्ञान को। आयुर्वेद की परंपरा लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी है जो आज भी निर्विवाद रूप से प्रत्येक जन मानस के लिए उत्तम स्वास्थ्य का सबसे प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा चिंतन की प्रेरणा देती है और समस्त भाषाओं को स्वयं में आत्मसात करती है। उन्होंने यह भी कहा कि आहार व्यवहार का जीवन मे सर्वाधिक महत्व होता है, सात्विक आहार आत्मबल प्रदान करता है, वहीं राजसिक आहार मन को क्रियाशील करता है तो तामसिक आहार मनुष्य को निष्क्रियता की ओर ले जाता है। उन्होंने बताया कि संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए आयुर्वेद में अपार संभावनाएं है जिसमे वेंअपना करियर बना सकते है।
स्वागत उद्धबोधन विभागाध्यक्ष प्रो. मिश्रीलाल ने दिया। संचालन डॉ. दीपक कुमार शर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. पूनम सिंह ने दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. हबीबुल्लाह, डॉ. त्रिपुरसुन्दरी, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. रंगनाथ मिश्रा, डॉ. संजीव वीर सिंह, डॉ. विश्रुत द्विवेदी आदि अध्यापक गण उपस्थित रहे।
