
वाराणसी।डीएवी पीजी कॉलेज में शनिवार को आइक्यूएसी के अंतर्गत दिव्यांग कमेटी, मनोविज्ञान विभाग एवं किरण सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में ‘दिव्यांगजनो का मनो – सामाजिक पुनर्वास’ विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. निधि मिश्रा ने कहा कि आज वह दौर आ गया है जिसमे दिव्यांगजनो को भी सामान्य व्यक्ति के तौर पर स्वीकारोक्ति मिले। इसके लिए आवश्यक है समावेशी शिक्षा की बात को धरातल पर उतारने की। समावेशी शिक्षा तभी संभव है जब शिक्षक भी उसके लिए विशेष शिक्षण पद्धति सिखलाई जाए। उन्होंने यह भी कहा की दिव्यांगजनो को समाज से काट दिया जाता है जबकि उन्हें भी बेहतर माहौल का अधिकार है।
विशिष्ट वक्ता सामाजिक एकता विभाग, किरण सोसाइटी के अध्यक्ष राजेंद्र राय ने दिव्यांगजनो के लिए रोजगार के अवसरों, सरकारी योजनाओं और उनके जीवन यापन के तरीकों की चर्चा की। मनोविज्ञान विभाग, डीएवी पीजी कॉलेज की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ऋचारानी यादव ने मनोसामाजिक विषय पर व्याख्यान दिया।
अध्यक्षता महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य प्रो. सत्यगोपाल जी ने किया।
स्वागत कार्यक्रम संयोजक डॉ. कमालुद्दीन शेख, विषय स्थापना डॉ. पारुल जैन, संचालन डॉ. तरु सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन मितिन आहूजा ने दिया। इस मौके पर मुख्य रूप से प्रो. मधु सिसोदिया, डॉ. हबीबुल्लाह, डॉ. कल्पना सिंह, डॉ. हसन बानो, डॉ. नेहा चौधरी, डॉ. नजमुल हसन, डॉ. राजेश झा, डॉ. नाहिद आदि शामिल रहे।
प्रदर्शनी भी लगाई गई- कार्यशाला में दिव्यांगजनो के जीवन पर आधारित वार्षिक कैलेंडर का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। इस मौके पर दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाये गए उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
.
