वाराणसी । आज बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से लेकर तमाम बालिकाओं के लिए योजनाएं चल रही है । लेकिन स्त्रियों को लेकर काफी हद तक लोगों की धारणा बदली है और इन सभी विपरीत समस्याओं के बावजूद आज स्थितियाँ काफी बदली है पर अभी भी कुछ कसर बची है। आज के वैज्ञानिक युग में जब बालिका अन्तरिक्ष तक भले पहुँच गई है, पर आज भी जमीन पर बहुत से ऐसे जगह है जहां पर तेतर जैसी अंधविश्वास लोगों के मन-मस्तिष्क में अपनी पैठ बनाए हुए है। प्रेमचंद ने अपने समय के समाज में जो कुछ भी देखा उसका हूबहू सजीव चित्रण भी किया जो आज के समय में हमें रास्ता दिखाने का भी काम करता है। यह बात मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही की ओर से आयोजित दैनिक कार्यक्रम सुनों मैं प्रेमचंद के 1063 दिन पूरे होने पर संस्था के निदेशक राजीव गोंड ने कहा। प्रेमचंद की कहानी पूस की रात का पाठ रंगकर्मी हरिश पाल ने किया। इस अवसर पर एस के जाडिया, हरि पाल,प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, आलोक शिवाजी,संतोष कुमार, मेवालाल श्रीमाली, देव बाबू,विकास कुमार, विवेक त्रिपाठी, सुरेश चंद्र दूबे,राजेश श्रीवास्तव,मनोज विश्वकर्मा आदि थे।

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