विद्यार्थियों को श्री राम के आदर्श व्यक्तित्व को आत्मसात करना चाहिए– कुलपति प्रो शर्मा..

वाराणसी।जिसका अर्थ है कि योगी ध्यान में जिस शून्य में रमते हैं उसे राम कहते हैं।राम शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है “वह जो रोम रोम में बसे”। यदि हम सामाजिक, ऐतिहासिक आदि रूपों से देखेंगे तब भी यह परिभाषा सर्वथा उपयुक्त बैठती है। इतिहास का कोई पृष्ठ नहीं जहाँ श्री राम का प्रभाव न हो, समाज का कोई वर्ग नहीं जो राम भक्ति से अछूता हो। यह कहना तो कदापि अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री राम भारतीय जनमानस में बसते हैं। यहाँ पिछले सहस्त्रों वर्षों से आजतक जनता यदि किसी आदर्श शासनतंत्र को जानती है तो वो है रामराज्य। यदि कोई जिज्ञासावश जानना चाहे कि रामराज्य के इतने सहस्राब्दियों के बाद भी क्यों सब रामराज्य चाहते हैं तो उत्तर आता है करुणानिधान भगवान श्री राम की महानता।

उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी के श्री विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा के पावन पर्व पर आज वाग्देवी मंदिर में सामूहिक सुन्दरकांड पाठ के माध्यम से

बल, बुद्धि और कृपा प्राप्त करने तथा सकारात्मक ऊर्जा के माध्यम से सम्पूर्ण परिसर को आच्छादित करेगा ।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने उस दौरान कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए सौभाग्य का दिन है जो कि हम इस दिन, क्षण के साक्षी बन सके हैं।

यह क्षण लगभग 500 वर्षो के निरन्तर कठोर साधना, तपस्या, संघर्ष करने के बाद देश के यशस्वी माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद मोदी, श्री राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्य नाथ जी के सतत प्रयास से आ सका।आज सम्पूर्ण देश आस्था और भक्ति के सागर में डूबकर ‘राममय’ हो गया है,सारा देश दीपावली पर्व जैसा पर्व मना रहा है।सभी के रोम- रोम में राम के होने का एहसास हो रहा है।

आज के इस दिवस को हजारों वर्षों तक हमारी पीढ़ियां याद करेंगी जिसके हम सभी साक्षी बनकर जी रहे हैं।

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को सुंदरकांड के प्रत्येक दोहे और चौपाइयों के भाव को आत्मसात करने तथा भाव प्रबंधन के साथ अपने जीवन दर्शन को बनाने का संकल्प लेना चाहिए। भगवान श्री राम के आदर्श जीवन एक पुत्र,भाई, पति और श्रेष्ठ राजा के थे। उन्होंने सत्य,दया,करुणा,धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलते हुए राज किया। इन्हीं गुणों की वजह से उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।आप सभी उनके, मर्यादा स्वरुप को आत्मसात करें।राम शब्द सुख, शांति, आनंद, हर्ष और मोक्ष के मार्ग का प्रवाह है आप सभी इस आदर्श पथ के गामी बने।संस्कृतनिष्ठ जनों और विश्वविद्यालय परिवार के अभ्युदय ,उत्कर्ष की कामना के साथ अनंत शुभकामनाएं ज्ञापित करते हैं।

आज के दिन सम्पूर्ण परिसर के मंदिरों और भवनो पर विद्युत झालरों तथा भक्ति संगीत की ध्वनि तथा सुंदरकांड, कीर्तन और भजन से भक्ति प्रवाह के साथ राममय वातावरण में स्थापित हुआ।

उक्त अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो रामपूजन पाण्डेय, प्रो महेंद्र पाण्डेय, हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो विजय कुमार पाण्डेय, डॉ सत्येन्द्र कुमार यादव,डॉ अखिलेश मिश्र आदि उपस्थित थे।

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