
वाराणसी। सुभागी’ मुंशी प्रेमचंद लिखित गांव की एक भोलीभाली लड़की की कहानी है। इस कहानी में मुंशीजी ने पुरुष शाषित समाज में एक नारी के आत्ममर्यादा के संघर्ष के बारे में बताया है। यह एक मधुर व मर्मस्पर्शी कथा है। यह बातें मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही द्वारा प्रेमचंद स्मारक लमही में आयोजित दैनिक कार्यक्रम सुनों मैं प्रेमचंद के 1076 दिन पूरे होने पर संस्था के संरक्षक डा. व्योमेश चित्रवंश ने कहा। प्रेमचंद की कहानी सुभागी का पाठन अध्यापिका हर्षिता गुप्ता ने किया।
संस्था के निदेशक राजीव गोंड ने कहा कि मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी ‘सुभागी’ का कथानक समाज में बाल विधवा के समस्या पर केन्द्रित है साथ मुंशी जी हमे यह संदेश देते हैं कि बुढ़ापे में माँ बाप की सेवा केवल लड़के ही नहीं, बल्कि लड़कियां भी कर सकतीं है । राज वैभव सिंह को प्रेमचंद मित्र सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राम अचल, रामजी, अजय यादव, राहुल, प्रिंस सिंह, अरूण कुमार,पिंकू सिंह, देव बाबू, विवेक विश्वकर्मा, राहुल विश्वकर्मा, राजेश श्रीवास्तव, मनोज विश्वकर्मा आदि थे।
