
वाराणसी। डीएवी पीजी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना की तीन इकाइयों द्वारा चल रहे सात दिवसीय विशेष शिविर के पांचवें दिन गुरुवार को “लिंग संवेदीकरण” पे चर्चा हुई। मुख्य अतिथि डॉ. संगीता जैन ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हए कहा कि युवामन स्वयं को सामाजिक दृष्टिकोण से सोचने को और विचारों को साझा करने के लिए तैयार करें। समाज पुरुष और महिलाओं से किस भूमिका की अपेक्षा करता है, यह स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि लड़कों के लिए समाज बहुत क्रूर है उनसे यह अपेक्षा किया जाता है कि वह मजबूत हो, आर्थिक रूप से संपन्न हो और उन्हें रोने की आजादी भी नहीं मिलती और महिलाओं से गृहकार्य, बच्चों के देखभाल की जिम्मेदारी तथा सुंदर दिखने के लिए सौंदर्य प्रसाधन आदि करने की अपेक्षा करता है। इस तरह से बुनियादी स्तर पर ही लैंगिक भेदभाव दिखलाई पड़ता है। अब इस भेदभाव को समाप्त करने की प्रक्रिया में बढ़ना है।
दूसरे सत्र में प्रोफेसर पूनम सिंह ने रामायण तथा महाभारत काल को संदर्भित करते हुए कहा कि इन ग्रंथों ने मानवता, सकारात्मक विचार तथा सामाजिक व्यवहार का ज्ञान दिया। व्यवहारिक जीवन में भी इसका प्रभाव प्रत्यक्ष दिखलाई पड़ता है।
तीसरे सत्र में “महिलाओं का राष्ट्र निर्माण में भूमिका ” विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें 120 से अधिक स्वयंसेवकों ने प्रतिभाग किया। संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बंदना बालचंदनानी, स्वागत डॉ. कल्पना सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने दिया।
