
रिपोर्ट उपेन्द्र कुमार पांडेय, आजमगढ़
आजमगढ़।सनातन हिंदू धर्म में दशहरा का विशेष महत्व है। हर वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पृथ्वी पर मां गंगा का अवतरण हुआ था। इसलिए इस शुभ अवसर पर मां गंगा की पूजा और पवित्र समय नदी में स्नान करने का विधान है धार्मिक मान्यता है कि गंगा दशहरा पर अन्न,भोजन और जल समेत आदि चीजों का दान करता है तो उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य पं ऋषिकेश शुक्ल ने अनुसार वैदिक पंचांग ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का आरंभ 15 जून को देर रात 01 बजकर 03 मिनट पर हो रहा है। वहीं इसका समापन 16 जून को रात 02 बजकर 54 मिनट पर होगा।
उदयातिथि को आधार मानते हुए गंगा दशहरा 16 जून 2024 दिन रविवार हस्त नक्षत्र वरीयान योग में मनाया जाएगा।
गंगा दशहरा के दिन सुबह जल्दी उठ जाएं। वहीं अगर गंगा स्नान नहीं कर पाएं तो घर पर ही गंगाजल बाल्टी में डालकर स्नान कर लें। वहीं इसके बाद अब तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें गंगाजल, अक्षत और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। साथ ही गंगा आरती करें
गंगां वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतं । त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु मां ।।
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।
ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।।
इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही मांं गंगा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं इस दिन गरीबों और जरूरतमदों को फल, जूता, चप्पल, छाता, घड़ा और वस्त्र दान करने का विधान है। वहीं इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन गंगा स्नान करने से सभी तरह के पाप, रोग, दोष और विपत्तियों से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
