
(सगुन लान में सात दिवसीय शिव पुराण कथा शुरू)
वाराणसी। मंगलवार शिव को प्रिय सावन के पवित्र मास में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण की कथा का शुभारंभ मंगलवार को रथयात्रा स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु हर हर महादेव शंभो – काशी विश्वनाथ गंगे का उद्घोष करते चल रहे थे। कलश यात्रा में एक ही रंग की वेशभूषा में सजी सैकड़ों महिलाएं सर पर कलश धारण कर चल रही थीं।
कथा के मुख्य यजमान श्रवण अग्रवाल,अर्चना अग्रवाल व बक्सर बिहार से आए पं. रामदयाल मिश्र,शकुंतला मिश्र शिव महापुराण की पोथी सिर पर धारण कर चल रहे थे।
कलशयात्रा में सबसे आगे 21 डमरू वादकों का दल रास्ते भर डमरू वादन कर रहे थे। बैंड-बाजे पर गूंज रहे भजनों की धुन पर सैकड़ों की संख्या में भक्त झूमते-नाचते व हर-हर महादेव का उद्घोष करते चल रहे थे।
यात्रा में कथा वाचक वृंदावन से पधारे महामंडलेश्वर इंद्रदेव महाराज स्वयं भक्तों के साथ पैदल चल रहे थे।
रथयात्रा से निकली भव्य कलश यात्रा आकाशवाणी होते हुए महमूरगंज स्थित शगुन लान पहुंची, जहां पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
दोपहर एक बजे शिव महापुराण पोथी के पूजन के पश्चात् व्यासपीठ का विधिवत पूजन किया गया। स्वामी इंद्रदेव महाराज ने सावन मास व शिव महापुराण की कथा का महात्म्य बताया। उन्होंने काशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यदि यहाँ शिव महापुराण कथा का एक शब्द भी कान में पड़ जाय तो सौ यज्ञ का फल प्राप्त होता है, यहाँ महामृत्युन्जय मंत्र का जाप किया जाए तो एक मंत्र से हज़ार यज्ञ का फल प्राप्त होता है और यदि काशी में रुद्राभिषेक किया जाए तो एक हज़ार दिन के यज्ञ का फल प्राप्त होता है।कथा के विश्राम पर आरती की गयी। शोभायात्रा व कथा में श्रवण अग्रवाल, रामदयाल मिश्र, राहुल अग्रवाल, रविन्द्र गोयल, रविशंकर सिंह, अनूप नागर, धर्मेंद्र गोयल, गिरीश चंद्र, अजय पाण्डेय, अजय कुमार, दिलीप गुप्ता, रविनन्दन तिवारी, ज्ञानेश सेठ, विवेक वर्मा आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।
