रिपोर्ट अशरफ आदिल 

 

फूलपुर! रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है जो एक परिवार में खुशियों और एकता की भावना को बढ़ावा देता है उक्त विचार संघ प्रचारक सुबंधु जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा समानता,समर्पण और प्रेम की भावना से भरपूर यह पर्व जो पुरानी घटनाओं की याद दिलाती है, हिंदू समाज जब एक रस था , तब भारत को जगतगुरु की मान्यता थी, संस्कृति की रक्षा करने में माता बहनों की स्थान सर्वोपरी है, यह त्यौहार समाज में नारी के महत्व को भी प्रकट करता है, यह त्यौहार समाज में सामाजिक दरारों को दूर करने का भी अवसर प्रदान करता है और लोगों को एक दूसरे के प्रति समर्पित होने की महत्व को समझाता है।

उन्होंने कान्हा भारत पर्वों का देश माना जाता है यहाँ का हर दिन पावन होता है।भारत को भारत बनाने व बचाने में ऋषियों मुनियों की जितनी भूमिका रही ही है उससे कमतर भूमिका यहाँ के पर्व और त्योहारों की नही है।ये पर्व और उत्सव न होते तो यह देश 1400 वर्षों की गुलामी के कारण छिन्न भिन्न हो जाता।सबसे प्राचीन हिन्दुस्तान जो सनातन परंपरा का ध्वजवाहक और सामर्थ्यवान राष्ट्र था।यह पराधीन हो गया लेकिन इसकी उत्सव धर्मिता के कारण पराधीनता में भी हमने अपनी परंपराओं को नही छोड़ा़।

पर्व घटनाओं का स्मरण कराते है और इतिहास अनछुए प्रश्नों की ओर ले जाते है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ फूलपुर नगर के तत्वावधान में मंगलवार देर शाम बौड़ई स्थित जिला कार्यालय पर आयोजित रक्षा बंधन उत्सव के मुख्य वक्ता सह विभाग प्रचारक सुबंधु जी ने कहीं।

उन्होने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई बहनों के संदर्भ में ही नही है बल्कि पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है।आसुरी शक्तियों से रक्षा के लिये इंद्राणी ने इन्द्र को,राजा बली से संकल्प पूर्ति के लिये वामन रूपी विष्णु भगवान ने,द्रौपदी ने योगेश्वर श्रीकृष्ण को रक्षा सूत्र बांधे थे वही रक्षाबंधन है।

संघ इस पर्व को राष्ट्र रक्षा के निमित्त मनाता है।जो संदेश देता है एक दूसरे की रक्षा करना, देश, समाज,धर्म,संस्कृति,राष्ट्र,परिवार की रक्षा करना।

नगर संघचालक कृष्णकुमार ने कहा कि संघ की बदौलत ही आज देश में व्यापक परिवर्तन हुए है।जिनकी कल्पना भी नही की गई थी वे सब बातें साकार हो रही है।

संचालन नगर कार्यवाह उमा चरण ने किया।

स्वयंसेवको ने भगवा ध्वज व एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधा।इस मौके पर सह विभाग कार्यवाह बेचन सिंह,जिला प्रचारक मिथलेश, शशी, धीरेंद्र, नवीन आदि मौजूद रहे।

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