वाराणसी।गुरु (शिक्षक) संस्कृत-संस्कार और संस्कृति के परिदृश्य में विद्यार्थियों को उत्तम कर्म करने का पाठ पढ़ायें , शिक्षकों को भी श्रेष्ठ गुरु बन श्रेष्ठ विद्यार्थियों का जन्म दें,जब श्रेष्ठ विद्यार्थी होंगे तभी श्रेष्ठ भारत का निर्माण होगा।वही कर्णधार भारत के परिदृश्य को विश्व फलक पर स्थापित करेंगे।

उक्त विचार आज सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के वेद विभाग के अंतर्गत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन राष्ट्र कल्याण एवं संस्कृत परम्परा के अनुसार श्रावणी उपाकर्म (ऋषि पूजन) पर संस्कृत जगत को आशीर्वाद देते हुये कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने व्यक्त किया.

प्रो सुधाकर मिश्र ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस दिन सुबह दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद स्नान करते हैं। फिर कोरे जनेऊ की पूजा करते हैं। जनेऊ की गांठ में ब्रह्म स्थित होते हैं। उनके धागों में सप्तऋषि का वास माना जाता है। ब्रह्म और सप्तऋषि पूजन के बाद नदी या सरोवर में खड़े होकर ब्रह्मकर्म श्रावणी संपन्न होती है। पूजा के बाद उसमें शामिल जनेऊ में से एक जनेऊ पहन लेते हैं और बाकी के जनेऊ रख लेते हैं। पूरे वर्षभर जब भी जनेऊ बदलने की आवश्यकता होती है तो श्रावणी उपाकर्म के पूजन वाले जनेऊ को ही पहनते हैं। 

मुख्य अतिथि के रूप मे प्रो रामपूजन पाण्डेय ने कहा कि यह पर्व द्विजन्म के नाम से भी जाना जाता है,मनुष्य एक बार अपने माँ के तन से जन्म लेता है मनुष्यका जन्म ही नहीं पशुओं पक्षियों का भी इस तरह से जन्म होता है, लेकिन मनुष्य उन सबसे भिन्न है उसका श्रेष्ठ गुरुओ की सानिध्यता में शिष्य बनाकर आज के ही दिन गुरुकुलों में विद्याध्ययन के लिए प्रवेश दिया जाता है,यहाँ पर गुरु जन अपने शिष्यों को राष्ट्र,समाज और परिवार के प्रति उत्तमचरित्र,नैतिक,राष्ट्रीयता,संस्कार संस्कृति एवं दयाभाव का अध्ययन कराते हैं।शिष्य गुरु के प्रति अपने भाव और आदर के माध्यम से सम्पूर्ण समय समर्पित करते हैं संस्कृत दिवस और रक्षाबंधन का पर्व भी आज ही के दिन होता है।यह पापों के प्रायश्चित के लिए पूजन के माध्यम से किया जाता है।

प्रो सुधाकर मिश्र के अध्यक्षता में श्रावणी उपाकर्म के लिए वेद विभागाध्यक्ष प्रो महेंद्र नाथ पांडेय सहित अनेक अध्यापकों और विद्यार्थियो ने प्रातः गंगा तट पर स्नान आदि के साथ विधि पूर्वक गण पूजन किया। उसके बाद विश्वविद्यालय के वेद विभाग में मध्याह्न कुलपति बिहारी लाल शर्मा आशीर्वादन के एवं प्रो रामपूजन पाण्डेय के

अध्यक्षता में षोडशोपचार विधि से संस्कृत,संस्कृति और संस्कार तथा दया,करुणा,राष्ट्रीयता के भाव के लिये सप्तऋषि,गौरी -गणेश पूजन किया गया।

वेदविभागाध्यक्ष प्रोफेसर महेंद्र पाण्डेय के निर्देशन , डाक्टर विजय कुमार शर्मा के आचार्यत्व तथा डाक्टर सत्येन्द्र कुमार यादव के संयोजकत्व में सम्पन्न हुआ।

आयोजन में प्रो रामपूजन ,प्रो महेंद्र पान्डेय, प्रो सुधाकर मिश्र, विजय शर्मा,डॉ सत्येंद्र कुमार यादव,श्याम सुंदर तिवारी,सन्तोष दुबे, तथा छात्र आदि उपस्थित थे।

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