रतजगा हुआ, कजरी गीतों के साथ

 

सुधी श्रोताओं का साथ दिया पकौड़ी और जलेबा ने

 

अशोक जन्नाट्यशाला पुरातन परंपरा की गवाह बनी

 

 

लोक कवि हरि भइया की स्मृति में-स्वरांजलि

 

वाराणसी। रविवार की शाम, अशोक जन् नाट्यशाला कादीपुर (शिवपुर) कजरी गीतों के नाम रहा। सुप्रसिद्ध लोक गायिका सरोज वर्मा ने लोक गायक हरि भैया के स्मृति में आयोजित स्वरांजलि कार्यक्रम में कजरी गीतों की प्रस्तुति दी। हमका सावन में झूलनी गढ़ाय दा पिया (बनारसी कजरी), पंडित हरिराम द्विवेदी रचित – रिमझिम बरसे ले बदरिया, रात अनहरिया सवनवा, अंगनवा में चोर डोले ननदी, ढुनमुनिया कजरी के अंतर्गत- सखी हो, पियर भइल कुल देहिया, बारहमासा कजरी – हमारी सुधिया जिन बिसराया यार बलमू, और सावन झरे लागेला धीरे-धीरे कजरी गीतों को सुनाकर लोक गायिका सरोज वर्मा ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक कजरी गीतों पर सरोज वर्मा का सहयोग गायक और संगतकार नागेंद्र शर्मा (हारमोनियम), सुभाष कन्नोजिया (नाल), सुनील कुमार प्रसन्ना (शहनाई) एवं मुकेश कुमार (साइड इफेक्ट) ने दिया। शुभारंभ हरि भइया के गीतों के प्रसारण और उनके चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। हरि भैया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने प्रकाश डाला। संचालन डॉ (मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने कार्यक्रम का संचालन, धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश उदय ने दिया। संयोजन अशोक आनंद का रहा। इस अवसर पर प्रदीप नारायण सिंह ( राज परिवार – बाबू जगत सिंह), श्रीमती शोभना प्रधान, सुश्री धम्ममित्रा अशोक, श्रीमती सुनीता श्रीवास्तव, राम ललित सिंह, राम बच्चन, मंगल जी एडवोकेट, राजीव रंजन , आनंद, श्रीमती पूजा द्विवेदी, डॉ वी के सिंह, एवं डॉ जी एस मौर्य उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *