वाराणसी। महाभारत ग्रंथ ही योगेश्वर श्रीकृष्ण के जीवन का यथार्थ स्त्रोत है। रविवार को जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पूर्व संध्या पर महर्षि व्यास द्वारा रचित महाभारत के आधार पर ‘योगेश्वर श्रीकृष्ण’ एवं महर्षि बाल्मीकि के रामायण के अनुसार ‘मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्र’ के जीवन पर प्रमाणिक व्याख्यान माला तथा इन द्वय महापुरुषों पर महर्षि दयानन्द सरस्वती के पावन उद्गार पर उद्बोधन में प्रो ज्वलन्त शास्त्री (अमेठी) ने सिगरा स्थित गुरुनानक भवन के सभागार में कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन मानव मात्र के लिए अनुकरणीय है, न कि मात्र हिन्दू धर्म के लिए ही । यदि हमसबको भगवान श्रीकृष्ण के सच्चे जीवन को देखना है तो मात्र महाभारत के ही अनुसार ही, न कि पुराणों के आधार पर देखना होगा। कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्र के बारे में महर्षि बाल्मीकि के रामायण से ही उनके जीवन को देखना चाहिए, तभी हमसबको इन द्वय महापुरुषों के प्रति असीम श्रद्धा हो सकती है ।

विशिष्ट वक्ता राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित प्रो प्रशस्त मित्र शास्त्री (रायबरेली) ने भगवान कृष्ण व भगवान राम के बारे में विस्तार से बताया। अन्य वक्ताओं में महर्षि दयानन्द काशीशास्त्रार्थ स्मृति न्यास के मंत्री राजकुमार वर्मा व झारखंड आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान भारत भूषण त्रिपाठी ने अपना विचार रखा। अध्यक्षता डॉ शम्भूनाथ शास्त्री ने, स्वागत और संचालन प्रधान प्रमोद आर्य ‘आर्षेय’ ने की । धन्यवाद ज्ञापन मंत्री रवि प्रकाश आर्य ने किया ।

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