
आजमगढ़।भारतीय सनातन धर्म में हरतालिका तीज का बहुत बड़ा महत्व है भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व में मां पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिकेश शुक्ला ने बताया कि हरतालिका तीज व्रत में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं। वहीं कुछ जगहों पर कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। इस व्रत को बहुत ही कठिन माना जाता है, क्योंकि ये निर्जला व्रत होता है। इस दिन महिलाएं बिना अन्न-जल ग्रहण किए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज खासतौर से उत्तर भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज 6 सितंबर 2024 को मनाया जाएगा।
इस व्रत को हरतालिका तीज इसलिए कहा जाता है क्योंकि एक कथा के अनुसार, माता पार्वती को उनके पिता उनके इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से शादी करवाना चाहते थे। तब माता पार्वती की सहेली ने उन्हें अपने साथ घने जंगल में ले गईं। इस कहानी में “हरत” का मतलब अपहरण और “तालिका” का मतलब सहेली होता है। इस तरह “हरतालिका” शब्द बना है।
हरतालिका तीज की पूजा सुबह स्नान करने और अच्छे कपड़े पहनने के बाद की जाती है। सुबह का समय पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर किसी कारणवश सुबह पूजा ना हो पाए तो प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है। पूजा के दौरान हरतालिका की कथा सुनाई जाती है।
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 06 सितंबर 2024 को शाम 06:03 बजे से शाम 08:35 बजे तक रहेगी। कुल मिलाकर 2 घंटे 32 मिनट का पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा
अतः सुबह सूर्योदय के समय अपना दैनिक पूजा पाठ करें एवं भगवान शिव पार्वती जी की विशेष पूजा करें।
