वाराणसी।मातृभाषा की उन्नति बिना किसी भी समाज की तरक्की संभव नहीं है तथा अपनी भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना भी मुश्किल है। मातृ भाषा अपनी माँ को नहीं भूलने देती है।

उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित हिन्दी दिवस के पूर्व संध्या पर साहित्य संस्कृति संकाय प्रमुख प्रो दिनेश कुमार गर्ग ने व्यक्त किए।

सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी, आधुनिक भाषा एवं भाषा विज्ञान की विभागाध्यक्ष एवं संयोजिका डॉ विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि हिंदी भाषा हमारी राजभाषा के रूप में आज विश्व पटल पर प्रतिष्ठित है ।

14 सितंबर सन् 1949 को हिंदी भाषा के रूप में सारे देशवासियों के द्वारा स्वीकार किया गया ।हिंदी एक ऐसी भाषा है ,जिसने समय पर समाज में क्रांति का आह्वाहन किया चाहे वह आदिकाल हो , वह भक्ति काल हो या आधुनिक काल हो चाहे आज का परिवेश हो । आधुनिक काल में हिंदी ने समय-समय पर एक अलख जगाया है ,और समाज को परिवर्तित करके समाज की एक नई रूपरेखा तैयार की है ।हिंदी भाषा ने सदैव जोड़कर आपसी संपर्क को और सशक्त, समृद्ध किया है।

समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन हुआ।

धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रेम कुमार सिन्हा व संचालन डॉ सुमिता कुमारी ने किया ।

कार्यक्रम में डॉक्टर डॉ प्रेम निवास सिन्हा, डा सोहन कुमार, डा मोहम्मद सलीम,डा आशुतोष कुमार एवं छात्र सत्यजीत तिवारी, आनन्द कुमार झा, रितेश प्रकाश दुबे, बालेश्वर मिश्रा विपुल पांडेय, अंकित उपाध्याय, संजय दुबे, यस जयसवाल, यश तिवारी उपस्थित रहे।

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