
वाराणसी।हिंदी राष्ट्रभाषा बनाने के लिये अमोघ प्रयास किया जाना चाहिए।भारत की सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा है।भाषा हमारे संप्रेषण की भाषा ही नहीं होती है, यह हमारी साँस्कृतिक धरोहर और गौरव होती है।
हम सभी की भाषा भोजपुरी है इसी तरह से सभी प्रांतों की लगभग अपनी क्षेत्रीय भाषा हैं, हिंदी को दक्षिण प्रदेश के लोग स्वीकार नहीं करके बोलते थे कि हम पर हिंदी लादी जा रही है।इसी सोच से हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन सका।
उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान एवं आधुनिक भाषायें विभाग के द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस समारोह के अंतर्गत यूपी कालेज के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो रामसुधार सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किया।
प्रो सिंह ने कहा कि निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल – यह भारतेंदु हरिश्चंद्र का कथन है, जो एक सच्चे हिंदी सेवक और और राष्ट्रवादी चिन्तक, लेखक और कवि थे । भारतेंदु जी ने निज भाषा की उन्नति का नारा ही नहीं दिया, उसे सर्वतोमुखी समृद्ध बनाने का भी प्रयास किया। उन्होंने हिंदी को अंग्रेजी से टक्कर लेने वाली साहित्यिक भाषा की सामर्थ्य प्रदान की।
मातृभाषा सीखना और इसकी उन्नति करना सभी का कर्तव्य है। मातृभाषा से हमे गौरव प्राप्त होता है।अपने समाज की सभ्यता और संस्कृति से हमें अपनी भाषा ही जोड़ती है।
पूर्व प्रति कुलपति प्रो हेतराम कछवाह ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि हिंदी साहित्य के रूप में समृद्ध भाषा मानी जाती है ,और अनेकों साहित्यकार एवं साहित्यिक रचनाएं हिंदी में मिलती है ।जिसने समय समय पर एक नया उद्घोष किया है, समाज के सारे परिवेश को परिवर्तित करके क्रांति का बिगुल बजा दिया है।
अध्यक्षता करते हुए सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा हमारी राजभाषा के रूप में आज विश्व पटल पर प्रतिष्ठित है ।14 सितंबर सन् 1949 को हिंदी भाषा के रूप में सारे देशवासियों के द्वारा स्वीकार किया गया । जिस देश की अपनी राष्ट्रभाषा होती है वहां पर अपने राष्ट्रभाषा में अध्ययन- अध्यापन करते हैं वही देश उन्नती और तरक्की करते हैं।हमारे देश के नवजवान अन्य भाषाओं को अध्ययन करने में अपना बहुमूल्य समय दे देते हैं, इससे उनके लक्ष्य पर सार्थक प्रभाव नहीं पड़ता।हिंदी संस्कृत से निकली भाषा है, संस्कृत की बेटी है, इसे राष्ट्रभाषा बनाने के लिए इस विश्वविद्यालय का दायित्व और अधिक है जो हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के प्रयास में अपना योगदान दे सकते हैं।अपने सम्पूर्ण गतिविधियों में शामिल कर प्रचार प्रसार करते रहें।
आधुनिक काल में हिंदी ने समय-समय पर एक अलख जगाया है और समाज को परिवर्तित करके समाज की एक नई रूपरेखा तैयार की है ।हिंदी भाषा ने सदैव जोड़कर आपसी संपर्क को और सशक्त, समृद्ध किया है.
न्याय शास्त्र के उद्भट विद्वान प्रोफेसर रामपूजन पाण्डेय ने हिंदी दिवस के महत्व और विकास पर प्रकाश डालते हुए सभी मंच पर आसीन अतिथियों सहित स्वागत करते हुए हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाए जाने पर जोर दिया।
आधुनिक भाषा एवं भाषा विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ विद्या कुमारी चंद्रा ने हिंदी दिवस समारोह का संचालन/संयोजन किया।
डॉ विजय कुमार शर्मा वैदिक एवं आनंद कुमार पौराणिक मंगलाचरण किया।धन्यवाद ज्ञापन प्रो जितेन्द्र कुमार ने किया।
समारोह में प्रो रामकिशोर त्रिपाठी,प्रो शीतला प्रसाद शुक्ल,प्रो रामपूजन पाण्डेय,प्रो जितेन्द्र कुमार,प्रो सुधाकर मिश्र, प्रो महेंद्र पाण्डेय, प्रो हरिप्रसाद अधिकारी,प्रो अमित कुमार शुक्ल,प्रो राघवेन्द्र जी दुबे,
प्रो दिनेश कुमार गर्ग.
डॉ अनिल कुमार चतुर्वेदी, डॉ सोहन कुमार, डॉ अमित थापा, डॉ शैलेश कुमार, मोहम्मद सलीम. डॉ धर्म प्रकाश मिश्र आदि उपस्थित थे.
