वाराणसी। जयशंकर प्रसाद व मुंशी प्रेमचंद मानवता के उद्घोषक कथाकार थे। दोनों में ही सांस्कृतिक, मानवता व राष्ट्रीयता की दृष्टि से समरसता हैं। इसलिए दोनों ही मानवता विजय का स्रोत हैं। यह बाते केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान व महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट की ओर से आयोजित हिंदी साहित्य के दो मित्रवत स्तंभ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में शनिवार को हिन्दू कालेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के प्रो. रामेश्वर राय ने कही। तिब्बती संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि महाकवि जयशंकर प्रसाद वेदांत से बहुत प्रभावित थे। वह छायावाद कवि थे, वह भारतीय राष्ट्रवाद, संस्कृति व मानवता के समन्वयक थे। कहा कि मुंशी प्रेमचंद गांधी वादी विचार धारा के प्रचारक थे। उनका विषय वस्तु गरीब, पीड़ित व शोषित थे। कहा कि जयशंकर प्रयास व प्रेमचंद अपनी कविता व लेखनी के माध्यम से भारतीय संस्कृति व सभ्यता को प्रचारित व प्रसारित किया है। विषय प्रवर्तन साहित्यकार डा.रामसुधार सिंह ने किया। संस्थान की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने कहा कि महाकवि जयशंकर प्रसाद व मुंशी प्रेमचंद ने अपनी कविता व साहित्य के माध्यम से समाज मे व्याप्त कुरीतियों पर कुठाराघात किया। संचालन डॉ. सुशील कुमार सिंह और स्वागत डॉ. कविता प्रसाद ने किया। इस अवसर पर उपकुलसचिव डॉ. हिमांशु पांडेय, साहित्यकार डा.रामसुधार सिंह, प्रो. उमेश सिंह, अनुराग त्रिपाठी आदि थे।

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