वाराणसी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर समस्त ऊर्जा निगमों सहित वाराणसी के तमाम बिजली कर्मचारी और अभियंता कल 13 दिसंबर को निजीकरण के विरोध में निजीकरण विरोधी दिवस मनाएंगे और कार्यालय समय के उपरांत शाम 5 बजे भिखारीपुर स्थित हनुमानजी मन्दिर पर समस्त बिजली कर्मी विरोध सभा करेंगे। संघर्ष समिति ने आज समस्त कर्मचारी और अभियंता को लोगो को जागरूक कर कल शाम -बजे से होने वाली सभा मे इक्कट्ठा होने का निर्देश दिया। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन ने अनावश्यक तौर पर निजीकरण का निर्णय लेकर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है ।

बिजली कर्मचारी शांतिपूर्वक बिजली व्यवस्था बेहतर बनाने में लगे हुए थे लेकिन अब प्रबंधन इसे पटरी से उतार देने पर तुला हुआ है।

वक्ताओ कहा प्रबंधन ने अचानक प्रदेश के 42 जनपदों में बिजली वितरण के निजीकरण की घोषणा कर बिजली कर्मियों को उद्वेलित कर दिया है और अनावश्यक रूप से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है । बिजली कर्मी अभी भी पूरी मेहनत से कार्य कर रहे हैं और निजीकरण के विरोध में सभी ध्यानाकर्षण कार्यक्रम कार्यालय समय के उपरांत कर रहे हैं जिससे बिजली व्यवस्था पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े और उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत ना हो।

संघर्ष समिति ने कहा की दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से वर्ष 2023- 24 में प्रति यूनिट रुपया 4.47 मिल रहा है जबकि निजी क्षेत्र की टोरेंट कंपनी से आगरा शहर में पावर कारपोरेशन को मात्र रुपया 4.36 प्रति यूनिट मिला है । यह आंकड़े साफ तौर पर बता रहे हैं की ग्रामीण क्षेत्र और चंबल के बीहड़ रहते हुए भी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से पावर कारपोरेशन को अधिक पैसा मिल रहा है और टोरेंट को बिजली देने में पावर कारपोरेशन को घाटा हो रहा है ।फिर भी निजीकरण के ऐसे विफल प्रयोग को पावर कार्पोरेशन प्रबंधन किस कारण से उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर थोपना चाहता है यह समझ में नहीं आ रहा है।

उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी अंकुर पाण्डेय ने दी है

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