वाराणसी। हुनर, यानी हाथों की कलाकारी, ग्रामीण महिलाओं के सपनों को साकार करने का जरिया बन रहा है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर), भारत सरकार के टी.डी.यू.पी.डब्ल्यू. स्कीम के तहत साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट द्वारा प्रशिक्षित इन महिलाओं को अपने कौशल को प्रदर्शित करने का मौका मिला है। उनके सपनों को अब नई उड़ान मिल रही है। महाकुंभ पर्व के लिए महिलाओं द्वारा बनाए गए अंगवस्त्रों की बढ़ती मांग ने उन्हें न केवल आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके परिवार के लिए आर्थिक संबल भी प्रदान किया है। श्वेता मोदनवाल कहती हैं, “मेरे अंदर हमेशा से एक सपना था कि मैं अपने परिवार का सहारा बनूं। साईं इंस्टिट्यूट मेरे लिए वह सहारा बना, जिसने मेरे हुनर को निखारा और आज मुझे अपने सपने साकार करने का अवसर दिया।”

इसी प्रकार, उषा मौर्या, ज्योति, प्रतिमा इशरत, आशा समेत कई अन्य महिलाएं कुंभ से मिले ऑर्डर को सफलतापूर्वक पूरा करने में जुटी हैं। दर्जनों महिलाएं और युवतियां, जो पहले रोजगार के साधन ढूंढ रही थीं, अब महाकुंभ के लिए अंगवस्त्र तैयार कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। पूर्व में प्रशिक्षित महिलाओं ने जी-20 के दौरान वाराणसी आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए अंगवस्त्र तैयार किए थे। अब इन महिलाओं के उत्पादों की मांग अब न केवल बनारस बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन महिलाओं के हुनर की सराहना की है।

संस्थान के निदेशक अजय सिंह ने कहा, “मैं डीएसआईआर, भारत सरकार का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष को समझा और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया।”

यह पहल महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता का संचार कर रही है और समाज में उनके लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

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