
वाराणसी।गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन और उपदेशों को यदि आत्मसात किया जाय तो निश्चित ही जीवन के मूल उद्देश्य की पूर्तिहोगी।”गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन और उपदेश हमें सिखाते हैं कि जीवन में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें मजबूत और साहसी बनना चाहिए।”
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने गुरु गोविंद सिंह जयंती पर्व पर उन्हें स्मरण कर व्यक्त किया।
कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि
गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन के बारे में बताया, “गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना में हुआ था। वह सिख धर्म के दसवें गुरु थे। उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
कुलपति प्रो शर्मा ने आगे कहा गुरु गोविंद सिंह जी ने सिख धर्म को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की, जो सिख धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सिखों को एकजुट करने के लिए कई प्रयास किए और उन्हें सिख धर्म के सिद्धांतों के बारे में शिक्षित किया।”
प्रो बिहारी लाल शर्मा ने गुरु गोविंद सिंह जी के उपदेशों को याद करते हुए कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी ने कहा था, ‘चिड़ियों को चुगने दो, परंतु अपने लक्ष्य से कभी नहीं हटो।’ यह उपदेश हमें जीवन में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने आगे कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी ने कहा था, ‘जीवन में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें मजबूत और साहसी बनना चाहिए। हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कभी हार नहीं माननी चाहिए।’ यह उपदेश हमें जीवन में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।
वीसी प्रो• बिहारी लाल शर्मा ने अंत में कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन और उपदेश हमें सिखाते हैं कि जीवन में संघर्ष और चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें मजबूत और साहसी बनना चाहिए। हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कभी हार नहीं माननी चाहिए।
