वाराणसी। सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती,प्रसंस्करण एवं विपरण चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपरण संस्थान, जयपुर द्वारा प्रायोजित एवं विस्तार इकाई, सुगन्ध एवं सुरस विकास केंद्र, कानपुर द्वारा साई इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवेलपमेंट, बसनी में आयोजित किया जा रहा है। बुधवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम में सुगन्ध एवं सुरस विकास केंद्र, कानपुर के प्रभारी ने सुगन्ध एवं सुरस विकास केंद्र, कन्नौज में उपलब्ध सुविधाओं तथा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। केंद्र की डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म से केंद्र का वर्चुअल भ्रमण करवाया। द्वितीय सत्र में राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ नीलम गुप्ता ने कुछ सामान्य तथा आसानी से सुलभ औषधीय पौधों के बारे में पावर पॉइंट के माध्यम से व्याख्यान दिया। नीम,आँवला, ब्राह्मी, गिलोय, सर्पगंधा, अश्वगंधा, तुलसी आदि के विभिन्न रोगों में उपयोग के बारे में तथा किस प्रकार उपयोग करे इसके बारे में समुचित चर्चा की। तृतीय तकनीकी सत्र में पटना बिहार से आये तथा विगत 25 वर्षों से औषधीय व सुगन्धित खेती कर रहे श्रीकृष्ण प्रसाद ने विभिन्न औषधीय सतावर, नीम, कालमेघ, तुलसी ,सर्पगंधा, अश्वगंधा आदि की व्यवसायिक दृष्टि से चर्चा की। पावर पॉइंट से खेती करने के तरीकों को विस्तार से बतलाया। वातावरण के अनुकूल सुगंधित संभवित फसलों में लेमनग्रास की खेती के बारे में पेशे से अध्यापक एवं लेमनग्रास की खेती कानपुर में कर रहे आरके त्रिपाठी ने इसकी खेती सरकार के सहयोग से कैसे आसानी से किया जा सकता है,की जानकारी दी। कार्यक्रम संयोजक डॉ भक्ति विजय शुक्ला ने बिहार से आये श्रीकृष्णा प्रसाद को कर सम्मानित किया। धन्यवाद ज्ञापन अजय सिंह ने दिया। संयोजन में पुष्कल त्रिपाठी, अंकित प्रजापति ने सहयोग किया।

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