
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर ग्रामीण महिलाओं में जागरूकता कार्यक्रम
वाराणसी। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आज साईं इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट (बसनी) में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व हेतु भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना विषय के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं को विज्ञान और नवाचार की भूमिका पर जानकारी दी गई। मुख्य अतिथि आईपीआर एक्सपर्ट संजय रस्तोगी ने कहा विज्ञान और नवाचार का उपयोग कर महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त कर सकती हैं। हमें ग्रामीण स्तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। जिससे महिलाएँ स्वरोजगार और उद्यमिता में आगे बढ़ सकें।
विशिष्ट अतिथि शिवकुमार शुक्ला, समाजसेवी एवं अध्यक्ष आर्यावर्त फाउंडेशन ने कहा कि विज्ञान और नवाचार का लाभ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीण महिलाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना कर नए तकनीकों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे वे कृषि, पर्यावरण और छोटे उद्योगों में क्रांति ला सकें। साईं इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट के निदेशक अजय सिंह ने बताया कि संस्थान ग्रामीण महिलाओं को विज्ञान आधारित प्रशिक्षण और नवाचार की जानकारी देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हमारे संस्थान में महिलाओं को नई तकनीकों से अवगत कराया जाता है। जिससे वे न केवल स्वयं सशक्त बनें बल्कि अपने परिवार और समाज को भी आगे ले जाएँ। इस अवसर पर हुनर-ए-बनारस और रूरल वुमन टेक्नोलॉजी पार्क की महिलाओं ने अपने नवाचार आधारित उत्पादों का प्रदर्शन किया। जिसमें जैविक धूप, प्राकृतिक रंग और अपशिष्ट फूलों से बने उत्पाद प्रमुख रहे। स्वागत हुनर-ए-बनारस की डिज़ाइनर अनुपमा दुबे, धन्यवाद ज्ञापन दुर्गेश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर दुर्गा दुबे, ममता सिंह, ज्योति कुमारी, सरिता शर्मा, रेनू सिंह, मीना देवी, वंदना देबी सहित ग्रामीण महिलाएँ, छात्राएँ और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
