
पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान और तालाबों का जीर्णाेद्धार: एक विमर्श विषयक दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न
वाराणसी। बीएचयू में इतिहास विभाग सामाजिक विज्ञान संकाय में पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान और तालाबों का जीर्णाेद्धार: एक विमर्श विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कुलाधिपति केन्द्रिय विश्वविद्यालय झारखण्ड कुलाधिपति प्रो. जय प्रकाश लाल ने कहा कि जल स्रोत अर्थात तालाब, कुण्ड, पोखरा आदि को सरक्षित करने की जिम्मेदारी सभी की है। महात्मा गॉधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ला ने कहा कि तालाबों, कुण्ड़ों, पोखरों को तभी बचाया जा सकता है जब उसे आम जनजीवन में जोड़ेगे। जब तक तालाब, पोखरा, कुण्ड आम जनजीवन से जुड़ा रहा, तब तक वह सुरक्षित रहा। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री राम शरण वर्मा थे। मुख्य वक्ता नेहरू विज्ञान केन्द्र इलाहाबाद वि वि प्रयागराज प्रो. सुधीर कुमार सिंह कहा कि तालाबों का जीर्णोद्धार तभी हो सकता है जब पारंपरिक ज्ञान एवं वैज्ञानिकता को एक साथ मिलाकर प्रयास किया जाये। विषय प्रस्तावना प्रो. ए. गंगाथरन, अतिथियों का स्वागत प्रो. घनश्याम और संचालन कार्यशाला संयोजक प्रो. अशोक कुमार सोनकर ने किया।कार्यशाला में तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. ताबिर कलाम और सह अध्यक्षता हिन्दू कालेज जमनियां के पूर्व प्राचार्य प्रो. शरद कुमार ने किया। मुख्य वक्ता प्रो राणा पी बी सिंह रहे। अवसर पर प्रो. एच. के. सिंह, प्रो. केशव मिश्रा, डॉ. सीमा मिश्रा, डॉ. ब्रिजेश कुमार प्रसाद, प्रो. अनुराधा सिंह, प्रो. सुतापा दास, डॉ. नीरज कु. त्रिवेदी, डॉ. मिनाझी झा, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. उमेश राय, डॉ. आदेश कुमार, डॉ. प्रमोद गुप्ता, श्री कैलाश विश्वकर्मा, सुनील यादव, अनामिका, रूही, सर्वजीत पाल, प्रिन्स उपाध्याय, अनुराग वर्मा, अंकित आदि थे।
