ऐसे मंचित नाटकों के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन होगा– कुलपति प्रो शर्मा।

वाराणसी।माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी महिला सशक्तिकरण पर काम किया और भारतीय संस्कृति की रक्षा की। अहिल्याबाई होल्कर एक महान शासक और समाज सेविका थीं, जिन्होंने अपने जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने मंदिरों का निर्माण करवाया, घाट बनवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया और मार्गों का निर्माण करवाया। उन्होंने भूखों के लिए अन्नसत्र खोले और प्यासों के लिए प्याऊ बिठलाईं।

उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पाणिनी भवन सभागार में राजभवन के निर्देश पर दिनाँक 08 मार्च 2025 को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व महिला अध्ययन केंद्र के द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों मे अहिल्याबाई होल्कर के व्यक्तित्व तथा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी एवं भरत मिलाप का मंचन तथा विभिन्न विषयों पर भाषण प्रतियोगिता के अंतर्गत श्रीमती पूजा दीक्षित,क्षेत्रीय मंत्री, महिला मोर्चा, भाजपा, काशी क्षेत्र, वाराणसी ने बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया।

उन्होंने नारी उत्थान के दृष्टिगत कहा कि इस देश मे यदि हम अपने बच्चों के प्रति सजग रहें तो निश्चित ही आज जो भी दैहिक या भौतिक यातना की घटनाएँ हो रही हैं उस पर रुकावट आयेगी।आज यहां सो नाटकों का मंचन क्रमशः माता अहिल्याबाई के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को दर्शाया गया जिसमें महिला सशक्तिकरण तथा मर्यादापुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी एवं भरत मिलाप का मंचन हमारी संस्कृति का साक्षात दर्शन है इससे समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।अहिल्याबाई होल्कर ने अपने कृतित्व से नारी शक्ति का विकास किया और सोयी हुई नारी शक्ति को जागृत किया। उन्होंने ऋषि तुल्य आचार्यों की तपोभूमि को भी संरक्षित किया।

उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने करते हुए कहा कि आज महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक कार्य किए जा रहे हैं। हमारे वेदों-पुराणों में भी माँ की पूजा का विधान है।अहिल्याबाई होल्कर की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय और प्रभावशाली हैं। उन्होंने इंदौर को एक समृद्ध और सौंदर्य की दृष्टि से मनभावन शहर में परिवर्तित किया। उन्होंने मालवा क्षेत्र में किलों और सड़कों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई हिंदू मंदिरों के संरक्षक के रूप में काम किया।अहिल्याबाई होल्कर की मेहनत और समर्पण की भावना ने उन्हें एक सच्ची देशभक्त और समाज सेविका बनाया। उनकी विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है और हमें महिला सशक्तिकरण और समाज सेवा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करती है। अहिल्याबाई होल्कर की कहानी हमें यह भी सिखाती है कि कैसे एक महिला ने अपने जीवनकाल में इतना कुछ हासिल किया और समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन लाया। उनकी विरासत को हमें कभी नहीं भूलना चाहिए।

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि आज दोनों नाटकों का प्रभाव हमारे जीवन पर प्रभावी होगा और विभिन्न विषयों पर भाषण प्रतियोगिता के माध्यम से सकारात्मक विचार का प्रवाह होगा।

अद्भुत नाटकों के मंचन से समाज पर सकरात्मक प्रभाव होगा।

विश्वविद्यालय कर महिला अध्ययन केन्द्र के द्वारा दो नाटकों का मंचन क्रमशः माता अहिल्याबाई होल्कर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व तथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी एवं लघु भ्राता भरत मिलाप पर 12 मिनट और 07 मिनट का विद्यार्थियों के द्वारा मंचन किया गया जिसमें हमारी संस्कृति और परंपराओं का विशेष महत्व दिखा जहां माता अहिल्याबाई ने अपने राज धर्म का पालन निष्ठापूर्वक करके अपने पुत्र जो दंडित कर एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया तथा वहीं दूसरी तरफ भरत मिलाप अद्वितीय प्रभाव जीवन के मूल्यों और आदर्शों को संरक्षित कर भारतीय संस्कृति का संदेश देता है। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी

भाषण प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले विभिन्न विषयों में दहेज प्रथा उन्मूलन,दहेज प्रथा उन्मूलन,वृद्धा आश्रम की आवश्यकता क्यों,रवि दीक्षित- दहेज प्रथा उन्मूलन,विकसित भारत की संकल्पना,कृषि में महिलाओं का योगदान, बाल विवाह पर प्रतिबंध, वृद्धा आश्रम की आवश्यकता क्यों?

इसमे महिला अध्ययन केन्द्र भाषण प्रतियोगिता में सम्मिलित छात्र अखिलेश मिश्रा,वृद्धा आश्रम की आवश्यकता क्यों प्रथम, रवि दीक्षित- दहेज प्रथा उन्मूलन-1st अर्पित मिश्रा विकसित भारत की संकल्पना 2nd नितिश कुमार ठाकुर- वृद्धा आश्रम की आवश्यकता क्यों 2nd,नित्यानंद शर्मा- कृषि में महिलाओं का योगदान-3rd

विश्वविद्यालय परम्परानुसार

स्वागत और अभिनंदन संयोजिका महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो विधु द्विवेदी ने किया।मंच पर आसीन अतिथियों के द्वारा विश्वविद्यालय के परंपरा के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती तथा अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।डॉ कंचन पाठक ने संचालन किया।धन्यवाद ज्ञापन डॉ विद्या कुमारी ने किया।

समारोह में प्रो चंद्रकांता, प्रो• प्राचार्य रचना दुबे,प्रो शैलेश कुमार मिश्र, प्रो हीरक कांत, प्रो राजनाथ, डॉ पद्माकर मिश्र, डॉ उमा पति उपाध्याय सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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