वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा के अध्यक्षता में शुक्रवार को पाणिनि भवन सभागार में राजभवन के निर्देश के आलोक में “पढ़े विश्वविद्यालय/पढ़े महाविद्यालय एवं बढ़े विश्वविद्यालय/बढ़े महाविद्यालय” शीर्षक के अन्तर्गत गीता पाठ एवं पुस्तकों का अध्ययन तथा विश्वविद्यालय परिवार के द्वारा “दहेज मुक्त भारत के लिए प्रतिज्ञा” तथा “नशा मुक्त भारत के लिए प्रतिज्ञा” का शपथ कराया गया।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय हमारे समाज के शिक्षा के केंद्र हैं, जहां छात्रों को ज्ञान, कौशल और मूल्यों की शिक्षा दी जाती है। इन संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाते हैं।”पढ़े विश्वविद्यालय/पढ़े महाविद्यालय एवं बढ़े विश्वविद्यालय/बढ़े महाविद्यालय” यह विषय हमें विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की भूमिका के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है। यह विषय हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे हम अपने विश्वविद्यालय और महाविद्यालय को और बेहतर बना सकते हैं और कैसे हम अपने छात्रों को और अधिक सशक्त बना सकते है।

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि

विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों को एक अच्छा नागरिक, एक अच्छा व्यक्ति और एक अच्छा पेशेवर बनाने में भी मदद करते हैं। यह संस्थान छात्रों को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बनाते हैं।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि “पढ़े विश्वविद्यालय/पढ़े महाविद्यालय एवं बढ़े विश्वविद्यालय/बढ़े महाविद्यालय” यह विषय महामहिम कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल जी के निर्देश पर आज उक्त शीर्षक के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिवार के साथ पूर्वाह्न 11.00 बजे से मध्यान्ह 12:00 बजे तक पुस्तकों का वाचन और गीता पाठ किया गया साथ ही सभी जनों को मुख्य भवन के समक्ष अपरान्ह 12:15 से दहेज मुक्त भारत एवं नशा मुक्त भारत विषय पर प्रतिज्ञा (शपथ) दिलाया गया।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने मुख्य भवन के समक्ष विश्वविद्यालय परिवार को उक्त विषयों पर प्रतिज्ञा कराते हुये कहा कि मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि विवाह के पवित्र बन्धन को दहेज रूपी सौदे से मुक्त रखूंगा।

मैं स्वयं दहेज न लूंगा और न ही दूंगा।

मैं दहेज लेने वालों और देने वालों का विरोध करूंगा।

मैं किसी भी प्रकार के नशे अथवा मादक पदार्थ का सेवन न स्वयं करूंगा, न ही अन्य को प्रोत्साहित करूंगा।

मैं नशे से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करूंगा।

मैं भारत को एक दहेज मुक्त, नशा मुक्त, समतामूलक, जिम्मेदार और स्वस्थ विचारों का पोषक समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहूंगा।

*इस देश को कैसे बेहतर और सशक्त बना सकते हैं*–

कुलपति प्रो शर्मा ने बताया कि

इससे हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे हम अपने विश्वविद्यालय और महाविद्यालय को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं और कैसे हम अपने छात्रों को और अधिक सशक्त बना सकते हैं। यह विषय हमें यह भी समझने में मदद करता है कि कैसे हम अपने समाज को और अधिक बेहतर बना सकते हैं और कैसे हम अपने देश को और अधिक समृद्ध बना सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन/संयोजक डॉ• रविशंकर पाण्डेय ने किया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में विद्यार्थियों एवं आचार्यों के द्वारा वैदिक मंगलाचरण किया गया।

डॉ दुर्गेश पाठक के साथ सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार ने सामूहिक गीता पाठ किया।

उक्त अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो• रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो• हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो हरिशंकर पाण्डेय, प्रो• हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो रमेश प्रसाद, प्रो• विधु द्विवेदी, प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो अमित कुमार शुक्ल, प्रो• विजय कुमार पाण्डेय, प्रो• शैलेश कुमार मिश्र, प्रो• हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो• महेन्द्र पाण्डेय,अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थियों आदि ने सहभाग किया।

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