वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में काशी के विशिष्ट-जनों के सहयोग से संचालित “*सम्वत्सरव्यापी चतुर्वेद विश्वकल्याण महायज्ञ*” विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ। इस महायज्ञ के आयोजन में प्रसिद्ध उद्योगपति आर. के. चौधरी, ऋषभ जैन, अशोक अग्रवाल, राजेश भाटिया सहित अनेक समाजसेवाव्रती महानुभावों का सक्रिय एवं रचनात्मक सहयोग प्राप्त हुआ।

*यज्ञ का स्वरूप एवं वैशिष्ट्य*

यह महायज्ञ सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा वैदिक परम्परा, भारतीय ज्ञान-परम्परा एवं विश्वशान्ति के उद्देश्य से एक वर्ष तक अनवरत संचालित किया गया। यज्ञ में चारों वेदों—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद—का नियमित संगीतमय पाठ हुआ। आचार्यों एवं याज्ञिक ब्राह्मणों द्वारा प्रतिदिन वैदिक ऋचाओं के उच्चारण के साथ आहुतियाँ दी गईं, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिसिंचित हुआ।

समापन समारोह के अवसर पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने यज्ञ के स्वरूप, वैशिष्ट्य एवं महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा।

यज्ञ में देशभर के वेदपाठी ब्राह्मणों, विद्वानों, आचार्यों एवं संत-महात्माओं के साथ-साथ प्रो रामपूजन पाण्डेय, प्रो हरिशंकर पाण्डेय, प्रो दिनेश गर्ग , प्रो सुधाकर मिश्र , प्रो शैलेश मिश्र , प्रो महेन्द्र पाण्डेय , डा विजय कुमार शर्मा प्रो विजय कुमार पाण्डेय , डा पद्माकर मिश्र , श्री राम विजय सिंह तथा श्री सुशील तिवारी आदि समस्त आचार्यों अधिकारियों व कर्मचारियों ने बडे उमंग और उत्साह से भाग लिया।

समापन दिवस पर बडी संख्या में सभी ने यज्ञ में भाग लिया और विधिपूर्वक आहुतियाँ अर्पित कीं। इस अवसर पर वेदविद्या के महत्व पर व्याख्यान आयोजित किया गया , जिसमें विद्वानों ने यज्ञ विज्ञान एवं उसके आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक पक्षों पर प्रकाश डाला।

यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात भव्य महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ने घोषणा की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को और अधिक विस्तार दिया जाएगा, जिससे भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक संस्कृति को नया आयाम मिल सके।

यह आयोजन सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा वैदिक ज्ञान परम्परा, धर्मसंस्कृति एवं राष्ट्रधर्म* के संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। इस यज्ञ से प्रेरणा लेते हुए विश्वविद्यालय एवं सहयोगी विद्वत्जन भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को अधिकाधिक प्रोत्साहित करने के लिए संकल्पबद्ध हैं।

स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर प्रातः9:30 बजे, वेद भवन में कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा विश्वविद्यालय परिवार के कल्याण एवं राष्ट्र वैभव उत्थान के लिये “शक्ति समाराधन” किया गया। जिसमें वेद विभाग के आचार्यों के द्वारा दुर्गासप्तशती पाठ, गौरी-गणेश का विधि-विधान से षोडशोपचार विधि के साथ पूजन किया गया।

स्थापनोत्सव पर्व के प्रारम्भ से आज सम्पूर्ण परिसर में वाद्ययंत्र के अविरल ध्वनि से गुंजायमान हो गया। सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिसर में अनवरत शहनाई की धुन और हवन की सुगंध से आच्छादित है।

स्थापना दिवस के अवसर पर कुलपति प्रो शर्मा ने चन्दन, अंगवस्त्र एवं मिष्ठान खिलाकर सभी आचार्यों एवं अधिकारियों का सम्मान किया।

यह विश्वविद्यालय मूलतः ‘शासकीय संस्कृत महाविद्यालय’ था जिसकी स्थापना सन् 1791 में की गई थी। वर्ष 1894 में सरस्वती भवन ग्रंथालय नामक प्रसिद्ध भवन का निर्माण हुआ जिसमें हजारों पाण्डुलिपियाँ संगृहीत हैं। 22 मार्च 1958 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ सम्पूर्णानन्द के विशेष प्रयत्न से इसे विश्वविद्यालय का स्तर प्रदान किया गया। उस समय इसका नाम ‘वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय’ था। सन् 1974 में इसका नाम बदलकर ‘सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय’ रख दिया।

उत्तर प्रदेश सहित देश भर के संस्कृत महाविद्यालय इससे सम्बद्ध हैं।

यहां संस्कृत, संस्कृति एवं संस्कार के संगम का प्रवाह होने के साथ-साथ सनातन धर्म संस्कृति का संवाहक बन या संस्था भारतीयता और राष्ट्रीयता का भाव सम्पूर्ण देश वासियों में जागृत करने का अनवरत प्रयास कर रहा है।

प्रो. रामपूजन पांडे, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. शम्भू नाथ शुक्ल, प्रो. हरिशंकर पांडे, प्रो. महेंद्र पांडे, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो.विजय कुमार पांडे, डॉ. विजय कुमार शर्मा,डॉ. दुर्गेश कुमार पाठक, डॉ. कुंज बिहारी द्वीवेदी ,डॉ. पदमाकर मिश्र,राम विजय सिंह,श्री नारायण दास व डॉ. रमेश कुमार सिंह देवरहवां बाबा ट्रस्ट के प्रतिनिधि,विकास समिति के सदस्य ह्रदय नारायण पांडे, राष्ट्रीय स्वयं संघ के सदस्य मुरारी दास,सुशील कुमार तिवारी, संतोष कुमार दुवे संजय कुमार तिवारी, संदीप कुमार चौबे, अंकुश कुमार शर्मा, अजितेश नाथ द्विवेदी,सुरेश कुमार, शिवांश उपाध्याय, नीतीश कुमार ठाकुर, सत्यानंद पांडे. जिज्ञासु पांडे के साथ छात्र, कर्मचारी उपस्थित थे।

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