
वाराणसी।परमाराध्य परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज द्वारा उत्तरप्रदेश सरकार को 40 दिन के अंदर गौमाता को राज्यमाता घोषित कर प्रदेश में पूर्णतया गोकशी प्रतिबंधित करने हेतु दिए गए समयावधि के 35 दिन पूर्ण होने पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म जयंती पर शुक्रवार को काशी के शंकराचार्य घाट पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिसके अंतर्गत सर्वप्रथम ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी महाराज ने विधिवत गंगापूजन किया।
छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र को तिलक कर पुष्प अर्पित किया एवं उपस्थित समस्त लोगों को गौरक्षा संकल्प दिलाकर शिवाजी के गौ ब्राह्मण प्रतिपालक होने पर शास्त्रीय आधार पर विवेचना कर संदेश दिया कि छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक थे।शिवाजी महाराज ने 12 वर्ष की उम्र में एक गौहत्यारे को दंडित कर उसके हाथों से गौमाता को छुड़ाकर गौमाता के लिए प्राण प्रण से लड़ने का उद्घोष किया।सनातनधर्म के शास्त्र कहते हैं कि राजा को गौ ब्राह्मण और देवायतन की रक्षा हेतु कटिबद्ध होना चाहिए।हमारे यहां भगवान राम भी विश्वामित्र के समक्ष प्रतिज्ञा करते हुए कहते हैं गौ ब्राह्मण व राष्ट्रहित के लिए ऋषिवर जो कहें वो पूर्ण करने हेतु मै प्रतिबद्ध हूं।भगवान राम,कृष्ण,आदि शंकराचार्य, राणाप्रताप एवं शिवाजीसिंह ने जो मार्ग प्रशस्त किया उसी मार्ग पर चलते हुए शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज ने बुधभूषणम ग्रन्थ में इस बात को दृढ़ता पूर्वक अंकित करते हुए कहा कि जो क्षत्रिय गाय ब्राह्मण और मंदिरों की रक्षा के लिए प्राण देता है वह स्वर्ग का अधिकारी होता है और उसकी कीर्ति अनंत काल तक प्रतिष्ठित रहती है।
शंकराचार्य महाराजश्री ने कहा कि आज शिवाजी जयंती पर प्रत्येक हिन्दू को यह संकल्प करने की आवश्यकता है कि अपने बीच अपने ही लोगों द्वारा जो गाय ब्राह्मण और मंदिरों को नष्ट करने का प्रयास हो रहा है उनसे धर्मयुद्ध लड़कर छद्म हिंदुओं को पहचानने का समय आ गया है इसी का आरंभ हम आज से कर रहे हैं।
साथ ही शंकराचार्य घाट पर ही सिद्ध कलाकारों द्वारा शिवाजी महाराज के जीवनी पर लघु नाटिका प्रस्तुत किया गया।जिसमें शिवाजी महाराज द्वारा गौरक्षा के दृश्य को प्रमुखता से दर्शाया गया
कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय सारस्वत परिषद के तत्वाधान में शंकराचार्य जी महाराज को उनके द्वारा गौरक्षा हेतु किए जा रहे प्रयासों के प्रतिफल करपात्र गौभक्त सम्मान से उनको विभूषित किया गया।संस्था की ओर से शंकराचार्य जी को यह पहला सम्मान गिरीश चंद्र तिवारी एवं प्रो.विवेकानंद तिवारी ने संयुक्त रूप प्रदान किया गया।
प्रातः 8:30 बजे पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज काशी स्थित श्रीविद्यामठ से 11 मार्च को लखनऊ में गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद करने हेतु प्रस्थान करेंगे।
यह जानकारी साझा करते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि शंकराचार्य जी महाराज श्रीविद्यामठ से चलकर सर्वप्रथम चिंता गणेश मंदिर पहुंचेंगे जहां विधिवत पूजन अर्चन करने के पश्चात शंकराचार्य जी महाराज संकट मोचन मंदिर पहुंचेंगे जहां पर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ,हनुमानाष्टक एवं बजरंगबाण का पाठ होगा।एवं शंकराचार्य जी महाराज गोरक्षक हनुमान जी महाराज का दर्शन कर इस धर्मयुद्ध में विजय प्राप्त करने हेतु प्रार्थना करेंगे।जिसके अनंतर काशी में विभिन्न स्थानों पर गौभक्त सनातनी जनता एवं अधिवक्ताओं द्वारा शंकराचार्य जी महाराज का पुष्पवर्ष के साथ स्वागत अभिनंदन होगा।और शंकराचार्य जी महाराज तय मार्गों द्वारा होते हुए 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे।
